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SMTP Kya hai? - what is SMTP in hindi

आज हम  computers in hindi  मे SMTP Kya hai? ( what is SMTP in hindi) smtp ka full form kya hai - internet tools in hindi  के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- SMTP Kya hai? (what is SMTP in hindi):- यह प्रोटोकॉल ई - मेल मैसेज को सीधे सर्वर पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले सर्वर इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप्त कर सकते हैं । smtp ka full form kya hai:- simple mail transfer protocol  simple mail transfer protocol in hindi:- इंटरनेट प्रोटोकॉल नेटवर्क पर ई - मेल ट्रांसफर के लिए यह प्रोटोकॉल प्रयोग में लिया जाता है । ई - मेल क्लाइंट सॉफ्टवेयर ई - मेल मैसेज भेजने के लिए SMTP का प्रयोग करते हैं तथा मैसेज प्राप्त करने के लिए पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल ( POP ) या इंटरनेट मैसेज एक्सेस प्रोटोकॉल ( IMAP ) का प्रयोग करते हैं । SMTP    सर्वर  इसके लिए पोर्ट नंबर 25 का प्रयोग करते हैं ।  simple mail transfer protocol   ई - मेल मैसेज को सीधे   सर्वर  पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले   सर्वर  इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप् कर सकते हैं ।

Operating system

Operating System क्या है? (What is operating system) :- 

जब आप कोई Mobile या फिर Computer/laptop  उपयोग करते हो तो हमेशा आप बोलते हो Android, Windows, Mac, Linux इत्यादि. तो ये सभी नाम आपरेटिंग सिस्टम के हैं. कभी Android kitkat / Android Oreo, या अगर Windows की बात करते हो तो इनको  बोलते है Windows 10, Windows 7, Windows 8, Windows XP इत्यादि. वैसे ही Mac OS भी होते है। लेकिन इन सबके बारे में हर किसी को थोडा बहुत ज्ञान जरुर है, लेकिन किसी को ये नहीं पता ये Computer का  हृदय, Operating System एक प्रकार का interface होता है। इसकेे बारे मे जानकारी चाहिए तो पूूूूरा पढना होगा-

आपरेटिंग सिस्टम क्या है (What is Operating System in Hindi):-  

ऑपरेटिंग सिस्टम । Operating System

Operating system  जो की आपके और Computer Hardware के बीच में Interface का काम करता है।

Introduction of operating system:- 

ऑपरेटिंग सिस्टम कुछ छोटे - छोटे प्रोग्राम का एक समूह है जो कि कम्प्यूटर हार्डवेयर तथा कम्प्यूटर प्रयोक्ता के मध्ये एक पुल ( Bridge ) का कार्य करता है । इसे सिस्टम सॉफ्टवेयर ( System Software ) , कंट्रोल सिस्टम ( Control System ) अथवा ऐक्जीक्यूटिव सिस्टम ( Executive Systein ) भी कहा जाता है । कम्प्यूटर निर्माताओं के द्वारा बनाया । गया यह सॉफ्टवेयर बाजार में तैयार मिलता है जिन्हें प्रयोक्ता खरीद कर इस्तेमाल करता है । सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में यह एक अतिआवश्यक तथा महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है जिसका कम्प्यूटर पर कार्य करते समय , उसकी मेमोरी में होना अति आवश्यक है । ऑपरेटिंग सिस्टम , बाजार में फ्लॉपी , डिस्क पर स्टोर मिलता है । अतः जब भी कम्प्यूटर पर कार्य करना होता है , सबसे पहले इसे फ्लॉपी से कम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी में स्थानान्तरित करना पड़ता है तथा इस प्रक्रिया को बूटिंग ( Booting ) कहते हैं।
ऑपरेटिंग सिस्टम कुछ विशेष प्रोग्रामों का ऐसा व्यवस्थित समूह है जो किसी कम्प्यूटर के सम्पूर्ण क्रियाकलापों को नियन्त्रित करता है । यह कम्प्यूटर के साधनों के उपयोग पर नजर रखने और व्यवस्थित करने में हमारी सहायता करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम आवश्यक होने User पर अन्य प्रोग्रामों को चालू करता है । वास्तव में यह उपयोगकर्ता और कम्प्यूटर के हार्डवेयर के बीच इण्टरफेस का कार्य करता है ।

ऑपरेटिंग सिस्टम की परिभाषाएँ ( Definition of Operating System ) :-

ऑपरेटिंग सिस्टम । Operating System

 ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का समूह है जो मानव , एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर | और कम्प्यूटर हार्डवेयर के बीच संवाद स्थापित करता है ।  ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा प्रोग्राम है , जो कम्प्यूटर के विभिन्न अंगों को निर्देश देता है कि किस प्रकार से प्रोसेसिंग का कार्य सफल होगा । ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर है , जो यूजर एवं कम्प्यूटर हार्डवेयर के बीच एक ध्या ( Tatafana ) की भाँति कार्य करता है ।


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Functions Of Operating System in Hindi:-

Operating system  कम्प्युटर के सफल संचालन की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । इसके प्रमुख चार प्रकार के कार्य होते हैं । 

 प्रोसेसिंग प्रबन्धन ( Processing Management ) :-

 कम्प्यूटर के सेण्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट के प्रबन्धन का कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है । यह प्रबन्धन इस प्रकार से होता है कि सभी प्रोग्राम एक - एक करके निष्पादित होते हैं । ऑपरेटिंग सिस्टम सभी प्रोग्रामों के समय को सी पी यु के लिए विभाजित कर देता है । 

मैमोरी प्रबन्धन ( Memory Management ) : -

प्रोग्राम के सफल निष्पादन के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम मैमोरी प्रबन्धन का अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण कार्य करता है । जिसके अन्तर्गत कम्प्यूटर मैमोरी में कुछ स्थान सुरक्षित रखे जाते हैं । जिनका विभाजन प्रोग्रामों के मध्य किया जाता है तथा साथ ही यह भी ध्यान में रखा जाता है कि प्रोग्रामों को मैमोरी के अलग अलग स्थान प्राप्त हो सकें । किसी भी प्रोग्राम को इनपुट एवं आउटपुट करते समय आँकड़ों एवं सूचनाओं को अपने निर्धारित स्थान में संग्रहीत  करने का कार्य भी ऑपरेटिंग सिस्टम का है । 

 इनपुट - आउटपुट युक्ति प्रबन्धन ( Input - Output De vice Management ) : -

 डेटा को इनपुट यूनिट से पढ़कर मैमोरी में उचित स्थान पर संग्रहीत करने एवं प्राप्त परिणाम को मैमोरी से आउटपुट यूनिट तक पहुँचाने का कार्य भी ऑपरेटिंग सिस्टम का ही होता है । प्रोग्राम लिखते समय । कम्प्यूटर को केवल यह बताया जाता है । कि हमें क्या इनपुट करना है और क्या आउटपुट लेना है , बाकी का कार्य ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है । 

 फ़ाइल प्रबन्धन ( File Management ) : -

ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों को एक सुव्यवस्थित ढंग से किसी डायरेक्टरी । में संग्रहीत करने की सुविधा प्रदान करता है । किसी प्रोग्राम के निष्पादन के समय इसे सैकण्डरी मैमोरी से पढ़कर प्राइमरी मैमोरी में डालने का कार्य भी ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है । 
●समस्त हार्डवेयर संसाधनों की क्षमता के पर्याप्त उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु ऑपरेटिंग सिस्टम एक साधन प्रबन्धक की भाँति कार्य करता है ।
●हार्डवेयर की क्षमता का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना भी ऑपरेटिंग सिस्टम का ही कार्य है । 
●ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता को एक आसान - सा इंटरफेस प्रदान करता है , ताकि वह कम्प्यूटर का प्रयोग सरलतापूर्वक कर सके । 
●कम्प्यूटर पर कार्य करने वाले उपयोगकर्ता का लेखा जोखा व्यवस्थित रखने का कार्य भी ऑपरेटिंग सिस्टम ही करता है एवं इस बात का ध्यान रखता है कि उपयोगकर्ता ने कितने समय के लिए कम्प्यूटर पर कार्य किया है ।


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Types of Operating system (ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार):-

● बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ( Batch Pro cessing Operating System ):-

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक प्रकार के सभी कार्यों को एक बैच ( Batch ) के रूप में संगठित करके साथ क्रियान्वित किया जाता है । इस कार्य के लिए बैच मॉनीटर सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है । इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग ऐसे कार्यों के लिए किया जाता है , जिनमें उपयोगकर्ता के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती । इस ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी प्रोग्राम के क्रियान्वन के लिए कम्प्यूटर के सभी संसाधन उपलब्ध रहते हैं , इसलिए समय प्रबन्धन ( Time Man agement ) की आवश्यकता नहीं होती । ये ऑपरेटिंग सिस्टम संख्यात्मक विश्लेषण ( Nurnerical Analysis ) , बिल प्रिंटिंग , पेरोल आदि में उपयोग किए जाते हैं ।

●सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम ( Single User Operating System ) : -

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में एक बार में केवल एक उपयोगकर्ता को ही कार्य करने की अनुमति होती हैं । यह सबसे अधिक प्रयोग किया जाने चाला ऑपरेटिंग सिस्टम है । 
उदाहरण के लिए विण्डोज 95 / NT / 2000 आदि ।

 ●मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम ( Multi User Op erating System ) : -

' मल्टी यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में एक से अधिक उपयोगकर्ता को कार्य करने की । अनुमति देता है । ये ऑपरेटिंग सिस्टम सभी उपयोगकर्ता के मध्य सन्तुलन बनाकर रखता है । प्रत्येक प्रोग्राम की संसाधन सम्बन्धी जरूरत को पूरा करता है । साथ - ही - साथ ये इस बात की भी निगरानी करता है कि किसी एक उपयोगकर्ता के साथ होने वाली समस्या दूसरे उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव न डालें । ये ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर के संसाधनों के सर्वाधिक उपयुक्त प्रयोग करता है । 
उदाहरण के लिए यूनिक्स , वीएमएस ( VMS ) आदि ।

● सिंगल टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम ( Single | Tasking Operating System ) : -

सिंगल टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में केवल एक प्रोग्राम को ही चलाया ( Run ) जा सकता है।
 उदाहरण के लिए ' पॉम ( Palm ) कम्प्यूटर में प्रयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम ।

● मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम ( Multi Task- ing Operating System ) : -

मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम में एक समय में एक से अधिक कार्यों को सम्पन्न करने की क्षमता होती है , इसमें उपयोगकर्ता आसानी से दो कार्यों के मध्य स्विच ( Switch ) कर सकता है । मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम को दो भागों में विभाजित किया गया है ।

● प्रीपटिव ऑपरेटिंग सिस्टम ( Preemptive Operating System) : -

इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम को कई कम्प्यूटर प्रोग्राम्स तथा हार्डवेयर डिवाइसेस शेयर ( Share ) करते हैं तथा उनका प्रयोग करते हैं । यह अपने समस्त कम्यूटेशन टाइम ( Computation Time ) को कार्यों के मध्य बाँट देता है तथा एक पूर्वनिर्धारित मापदंड ( Predefined Criteria ) के आधार पर ही नए कार्य का निष्पादन पूर्व कार्य के निष्पादन रोककर भी प्रारम्भ हो जाता है । 
उदाहरण OS / 2 , Window 95NT आदि।

● कोऑपरेटिव मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Cooperative Multi TaskingOperating Sys tem ) : -

यह मल्टी टास्किंग का एक सरलतम रूप होता है । इस ऑपरेटिंग सिस्टम में एक प्रोग्राम तब तक CPU का प्रयोग करता है जब तक उसे आवश्यकता होती है । यदि कोई प्रोग्राम CPU का प्रयोग नहीं कर रहा है तो वह दूसरे प्रोग्राम को अस्थाई रूप से CPU को प्रयोग करने की अनुमति दे देता है ।
 उदाहरण Mac OS , MS , Window 3 - X आदि ।

● टाइम शेयरिंग ऑपरीटग सिस्टम ( Time shar . ingOperating System ) : -

 इस प्रकार के सिस्टम में , एक साथ एक से अधिक उप प्रोग्राम कम्प्यूटर के संसाधनों का प्रयोग के  का प्रयोग करते हैं । इस कार्य में , कम्प्युटर अपने संसाधनों के प्रयोग हेतु प्रत्येक उपयोगकर्ता या प्रोग्राम को समय का एक छोटा भाग आवटित करता है जिसे टाइम स्लाइस या क्वांटम कहते हैं । इस राइम स्लाइस में आदि कोई उपयोगकर्ता या प्रोग्राम किसी संसाधन का प्रयोग कर रहा है तो दूसरा उपयोगकर्ता या प्रोग्राम उस संसाधन के प्रयोग हेतु प्रतीक्षा करता है , लेकिन यह समय इतना छोटा होता है कि अगले उपयोगकर्ता या प्रोग्राम को यह महसूस नहीं होता कि उसने प्रतीक्षा की है । उपयोगकर्ता यह समझता है कि वही एक मात्र उपयोगकर्ता है जो कम्प्यूटर का प्रयोग कर रहा है ।

● रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम ( Real Time Operating System ) :-

रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा मल्टी टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम होता है , क्रियान्वन्  किया जाता है । जैसे - एयरक्रॉफ्टों में प्रयोग होने वाला ऑटो पायलेट मैकेनिज्म ( Auto Pilot Mechanism ) इसमें एक प्रोग्राम के आउटपुट को दूसरे प्रोग्राम के आउटपुट की तरह प्रयोग किया जा सकता है , इस कारण पहले प्रोग्राम के क्रियान्वयन में देरी से दूसरे प्रोग्राम का क्रियान्वयन और परिणाम रुक सकता है । रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी भी दिए गए कार्य को पूरा करने की एक डेडलाइन दी गई होती है तथा इसी निर्धारित समय में उस कार्य को पूरा करना होता है । रीयल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम को दो भागों में बाँटा गया है ।
● हार्ड रीयल टाइम सिस्टम ये सिस्टम किस महत्त्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने की गारण्टी देता है । समय पर कार्य पूरा न होने की स्थिति में प्रोग्राम का निष्पाद फेल हो जाता है ।
 उदाहरण के लिए - एयरक्रॉफ्ट कण्ट्रोल सिस्टम्स , पेसमेकर्स आदि । 
● सॉफ्ट रीयल टाइम सिस्टम इस सिस्टम में  किसी कार्य को पूरा करने के लिए एक डेडलाइन दी जाती है किन्तु इस प्रकार के सिस्टम में कार्य का निष्पादन डेडलाइन से पहले और बाद में भी पूरा हो सकता है परन्तु इस स्थिति कार्य का निष्पादन फेल नहीं होता ।

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