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SMTP Kya hai? - what is SMTP in hindi

आज हम  computers in hindi  मे SMTP Kya hai? ( what is SMTP in hindi) smtp ka full form kya hai - internet tools in hindi  के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- SMTP Kya hai? (what is SMTP in hindi):- यह प्रोटोकॉल ई - मेल मैसेज को सीधे सर्वर पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले सर्वर इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप्त कर सकते हैं । smtp ka full form kya hai:- simple mail transfer protocol  simple mail transfer protocol in hindi:- इंटरनेट प्रोटोकॉल नेटवर्क पर ई - मेल ट्रांसफर के लिए यह प्रोटोकॉल प्रयोग में लिया जाता है । ई - मेल क्लाइंट सॉफ्टवेयर ई - मेल मैसेज भेजने के लिए SMTP का प्रयोग करते हैं तथा मैसेज प्राप्त करने के लिए पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल ( POP ) या इंटरनेट मैसेज एक्सेस प्रोटोकॉल ( IMAP ) का प्रयोग करते हैं । SMTP    सर्वर  इसके लिए पोर्ट नंबर 25 का प्रयोग करते हैं ।  simple mail transfer protocol   ई - मेल मैसेज को सीधे   सर्वर  पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले   सर्वर  इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप् कर सकते हैं ।

सॉफ्टवेयर क्या हैं तथा उसके प्रकार । Software hindi

सॉफ्टवेयर क्या हैं? (What is Software) :-

सॉफ्टवेयर ( Software  ) : -

सॉफ्टवेयर Computer का वह हिस्सा है जिसे हम देख सकते है, महसूस कर सकते हैं।  और  उस सॉफ्टवेयर  पर काम कर सकते हैं। सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के लिए हमें Hardware की आवश्यकता पड़ती हैै। जैसे :- Keyboard, Mouse, Monitor, CPU, Printer, Projector आदि की आवश्यकता होती है। Hardware को Computer का शरीर कहा जाता है ओर Software  को computer दिमाग कहते हैं। Software और Hardware दोनों एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं Software के बिना Hardware का कोई उपयोग नहीं और Software के बिना Hardware र्निजीव है।



हम कम्प्यूटर की मदद से कार्यों को विभिन्न प्रकार से कर सकते हैं । सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का ही एक और नाम है । इन को एक विशेष प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा जाता है । विशेष कार्य को पूरा करने के लिए यूजर्स । एप्लीकेशन का उपयोग करते है । जैसे , वर्ड प्रोसेसर का इस्तेमाल पुस्तक , पत्र तथा रिर्पोट बनाने में होता है । हालाकि , यूजर सिस्टम सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी करते हैं । computer के विभिन्न हार्डवेयर उपकरणों पर नियंत्रण रखने के लिए उपयोग किये जाने वाले साधनों को सॉफ्टवेयर कहते हैं । दूसरे शब्दों में कम्प्यूटर भाषायें , कम्प्यूटर को दिये जाने वाले निर्देश , प्रोग्राम , डाटा तथा कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम आदि सभी को सॉफ्टवेयर कहते हैं ।
 जैसे - System Software और Application Software आदि ।

सॉफ्टवेयर के प्रकार (Types of Software in computer) :-

कम्प्युटर  के विभिन्न हार्डवेयर उपकरणों पर नियंत्रण रखने लिए उपयोग किये जाने वाले साधनों को सॉफ्टवेयर कहते हैं । दूसरे शब्दों में कम्प्यूटर भाषायें , कम्प्यूटर को दिये जाने वाले निर्देश , प्रोग्राम , डाटा तथा कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम आदि सभी को सॉफ्टवेयर कहते हैं ।
कम्प्युटर साफ्टवेयर को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software), एप्लीकेशन साफ्टवेयर ( Application Software) और यूटिलिटी साफ्टवेयर (Utility Software) ।



सिस्टम सॉफ्टवेयर ( System Software ) : -

 सिस्टम सॉफ्टवेयर केवल एक प्रोग्राम नहीं , बल्कि अनेक प्रोग्राम  का संग्रह या प्रणाली हैं , जो यूजर के थोड़े या बगैर हस्तक्षेप के सैकड़ों तकनीकी विस्तारों को नियंत्रित करता है  सिस्टम सॉफ्टवेयर में चार प्रकार के प्रोग्राम होते हैं । तकनीकी नियंत्रण के लिए सिस्टम सॉफ्टवेयर यूजर , एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और कम्प्यूटर हार्डवेयर के साथ कार्य करता है । जैसे , मेमोरी में वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम को स्टोर करना , सिस्टम यूनिट में प्रोसेस होने के लिए निर्देशों का कन्वर्जन , और डॉक्यूमेंट या फाइल को सेव करना आदि कार्य सिस्टम सॉफ्टवेयर करता है ।
कम्प्युटर प्रणालियों तथा उसके डाटा प्रोसेसिंग प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने तथा उनकी सहायता करने वाले लिए सॉफ्टवेयर , सिस्टम सॉफ्टवेयर कहलाते हैं । सिस्टम सॉफ्टवेयर में निम्नलिखित सॉफ्टवेयर आते है ।
 ( i ) आपरेटिंग सिस्टम ( Operating System ) ,
( ii ) भाषा अनुवादक ( Language Translator )

● ऑपरेटिंग सिस्टम ( Operating System ( os ) ) : -

 कम्यूटर संसाधनो का समन्वय करता है , यूजर और कम्प्यूटर बीच इंटरफेस प्रदान और एप्लीकेशन को चलाता है । यह प्रोग्रामों का संग्रह है , जो कम्प्यूटर इस्तेमाल से संबधित अनेक तकनीकी विस्तारों का नियंत्रण करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम कम्प्यूटर प्रोग्राम का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण प्रकार है , इसके बिना आपका कम्प्यूटर किसी काम का नहीं है ।


ऑपरेटिंग सिस्टम को एक्जीक्यूटिव सिस्टम ( Executive System ) या कंट्रोल सिस्टम ( Control System ) भी कहते हैं । व्यवहारिक रूप से ऑपरेटिंग सिस्टम को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है - “ एक ऐसा प्रोग्राम जो CPU के कार्यों को संचालित करता है । कम्प्यूटर के इनपुट - आउटपुट को नियंत्रित करता है उच्च स्तरीय भाषा को मशीन भाषा में अनुवाद करता है तथा इस प्रकार के कई अन्य कार्यों में सहायता करता है । ''
 वैसे ऑपरेटिंग सिस्टम , छोटे - छोटे से कई प्रोग्राम्स का समूह है जिसका कम्प्यूटर के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान है । यह विश्व की कुछ ही कम्पनियों के द्वारा बनाकर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है । यह सॉफ्टवेयर ' के क्षेत्र में उतना ही महत्पूर्ण है जितना कि CPU हार्डवेयर के क्षेत्र में होता है । यह कम्प्युटर हार्डवेयर तथा अन्य सॉफ्टवेयर्स के मध्य पुल ( Bridge ) का कार्य करता है । इसकेी महत्वता इस बात से भी जाहिर है कि जब भी कम्प्युटर किसी काम में लिया जाना होता है , तब ऑपरेटिंग सिस्टम उसकी मुख्य मेमोरी में होना चाहिए । आज बहुत सारे ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार में उपलब्ध हैं , इनमें मुख्य हैं - Ms DOS , WINDOW , UNIX आदि । ऑपरेटिंग सिस्टम की निम्नलिखित विशेषताएं होती है-

( i ) Program Implementation -

जब कोई कार्य कम्प्यूटर के द्वारा करना होता है तब ऑपरेटिंग सिस्टम कार्य के लिए उपयुक्त प्रोग्राम को कम्प्यूटर सहायक मेमोरी से मुख्य मेमोरी में स्थानान्तरित करता है।

( ii ) Language Conversion -

 जब कोई प्रोग्राम बनाकर हमें उससे परिणाम प्राप्त करने हों तो सर्वप्रथम हमें उसे मशीनी भाषा में बदलना होता है जो कि एक विशेष प्रोग्राम कम्पाइलर ( Compiler ) अथवा असेम्बलर ( Assembler ) के द्वारा किया जाता है । इस भाषा रूपान्तरण के लिए जब प्रोग्राम को कम्प्यूटर में डाला जाता है । तो ऑपरेटिंग सिस्टम उपयुक्त कम्पाइलर अथवा असेम्बलर की सहायता से हमारे प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदल देता है ।

( iii ) File management -

 यह ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य कार्य है । कम्प्यूटर पर कार्य करते समय हम कई फाइलें बनाते हैं । ऑपरेटिंग सिस्टम हमारी बनाई गई फाइलों को स्टोर करने , जरूरत पड़ने पर पुन : मेमोरी में रूपान्तरित करने आदि का कार्य करता है । 

(iv) Experiment - 

एक ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न प्रकार की संरचना वाले कम्प्यूटरों पर भी प्रयोग किया जा सकता है । 

(v) Modification -

कम्प्यूटर पर किये जाने वाले कार्यों में परिवर्तन होने पर उस कार्य के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम में संशोधन किये जा सकते हैं । 

(vi) Equipment Management -

किसी पेरिफेरल उपकरण में अस्थायी गड़बड़ी आने पर ऑपरेटिंग सिस्टम उसे अन्य उपकरणों में बदल सकता है । उदाहरणार्थ - किसी प्रोसेसिंग के दौरान यदि प्रिंटर अचानक किसी कारणवंश रूक जाए तो ऑपरेटिंग सिस्टम के बजाए प्रोसेसिंग रोकने के परिणामों को किसी अन्य उपलब्ध आउटपट उपकरण पर स्थानान्तरित कर देगा । 

(vii) Analysis of disturbances -

कम्प्यूटर के किसी भी हिस्से में उत्पन्न गड़बड़ी जैसे की बोर्ड का चलना , मेमोरी चिप का खराब हो जाना आदि का विश्लेषण करके ऑपरेटिंग सिस्टम रिपोर्ट दे देता हैं । 

(viii) User number -

सभी ऑपरेटिंग तो नहीं परन्तु बहुत से ऑपरेटिंग सिस्टम एक समय में एक से  अधिक प्रयोक्ताओं ( Operator ) के कार्य कर सकते हैं । सभी प्रयोक्ता एक मुख्य कम्प्यूटर से टर्मिनल की सहायता से जुड़े होते हैं । 

(ix) Work diversity -

ऑपरेटिंग सिस्टम वाले मुख्य कम्प्यूटर से जुड़े सभी प्रयोक्ता यदि अलग - अलग कार्य कर रहे हों तो भी ऑपरेटिंग सिस्टम सभी कार्य एक साथ सम्पन्न करने की क्षमता रखता है । 

( X ) Accounting for use -

ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर द्वारा कम्प्यूटर के इस्तेमाल का सम्पूर्ण विवरण दिखा सकता है । किस यूजर ने किस तारीख को , किस समय से किस समय तक , किस कार्य हेत कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया है यह सभी जानकारी हम ऑपरेटिंग सिस्टम से प्राप्त कर सकते हैं ।

(2) भाषा अनुवादक ( LANGUAGE TRANSLATOR ) :-

इन्हें भाषा संसाधक ( Language Processors ) भी कहा जाता है । ये वो विशिष्ट प्रोग्राम होते हैं , जो उच्च स्तरीय अथवा असेम्बली भाषा में लिखे प्रोग्राम्स को मशीनी भाषा में रूपान्तरित करने का कार्य करते हैं । ये निम्न प्रकार के होते हैं | 

1 . असेम्बलर ( Assembler ) -

 यह असेम्बली भाषा में लिखे गये प्रोग्राम को मशीनी भाषा में रूपान्तरित करने के काम आता है ।

2 . कम्पाइलर ( Compiler ) -

यह उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गये प्रोग्राम को मशीनी भाषा में रूपान्तरित करने के काम आता है । यह स्त्रोत भाषा ( Source Language ) यानि उच्च स्तरीय भाषा के सभी निर्देशों को एक साथ पढ़कर समतुल्य मशीनी भाषा में निर्देश तैयार करता है । अगर प्रोग्राम में त्रुटि है तो सभी त्रुटियों की सूची एक साथ देता है। 

3 . इन्टरप्रेटर ( Interpreter ) -

 यह भी उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गये प्रोग्राम को मशीनी भाषा में रूपान्तरित करने के काम आता है । परन्तु यह स्त्रोत भाषा के एक बार प्रत्येक निर्देश के समतुल्य मशीनी भाषा में निर्देश तैयार करता है । यह प्रोग्राम की त्रुटि भी एक समय में एक ही दिखाता है ।

Difference between Compiler and Interpreter :-



ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर ( APPLICATION SOFTWARE ) :-

उन सभी प्रोग्रामों को एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहा जाता है , जिनपे हम अपना काम करते हैं जैसे - MSOffice में सभी Employee की सैलरी , सभी प्रकार का लेन - देन , रिर्पोट बनाना , । Photo को Edit करना आदि । कम्प्यूटर वास्तव में ऐसे ही काम के लिए खरीदे जाते हैं । यह काम हर कम्पनी और यूजर के लिए अलग - अलग तरह के होते है , इसलिए हमारी जरूरत के अनुसार Software Engineer हमारे लिए प्रोग्राम Develop करते हैं । अधिकतर प्रोग्राम सभी के लिए एक जैसे होते है जैसे - MS Word . Excel , Tally , Photoshop , Coraldraw , Pagemaker आदि । 
इन एप्लीकेशन सॉफ्टवेयरों को व्यापक रूप से लगभग जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता हैं जैसे
 Business > Education > Media Sciences > Banking > Industries
 ये सॉफ्टवेयर किसी एक उपभोक्ता की किसी विशिष्ट आवश्यकता या समस्या के समाधान हेतु प्रोग्रामर्स तथा System Analyst के द्वारा लिखे गये प्रोग्राम हैं । पेरोल ( Payroll ) , वित्तीय लेखांकन ( Financial Accounting ) , इन्वेन्ट्री कंट्रोल ( Inventory Control ) आदि कुछ मुख्य अनुप्रयोग ( Application ) हैं जिनके लिए इन प्रोग्राम्स को लिखा जाता है । चूंकि विभिन्न उपभोक्ताओं की समस्या एक समान नहीं होती है , अत : इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई मानक प्रोग्राम ( Standard Program ) नहीं बनाया जा सकता है ।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) :-

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर केो सर्विस प्रोग्राम कहते है, यह कम्प्युटर संसाधनों के प्रबंधन सबधी कार्य करता हैै।





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