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Illumination and Shading in Computer Graphics: Complete Guide (Hindi)

Illumination and Shading in Computer Graphics: Complete Guide (Hindi) Computer Graphics में 3D object को जीवंत और वास्तविक (Realistic) दिखाना सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। किसी भी 3D सीन (Scene) को वास्तविक दुनिया की तरह दिखाने के लिए Illumination (लाइटिंग) और Shading (शेडिंग) दो प्राथमिक तकनीकें हैं। ​इस गाइड में हम Illumination Model, Ambient, Diffuse, Specular Reflection, Light Source Attenuation, तथा Gouraud और Phong Shading को विस्तार से समझेंगे। physics से हम मॉडल प्राप्त कर सकते हैं, जिन्हें "Illumination model" कहा जाता है, कि कैसे light surfaces से reflect होता है और जो हम रंग के रूप में देखते हैं उसका उत्पादन करते हैं। illumination के मॉडल को lighting model भी कहा जाता है, इसका उपयोग प्रकाश की intensity की गणना करने के लिए किया जाता है जिसे हमें किसी object की surfaces पर दिए गए point पर देखना चाहिए। ​1. Illumination और Shading क्या है? (Introduction) Illumination(लाइटिंग):- किसी दिए गए point पर एक blocking surface पर per unit area में luminous flux है। Lighting:-...

भक्ति और आधुनिकता के बीच कांवड़ यात्रा: पौराणिक कथाओं से लेकर पर्यावरण की चुनौतियों तक

 कांवड़ यात्रा : आध्यात्म के साथ उभरती वर्तमान चुनौतियाँ :- कांवड़ यात्रा केवल एक पैदल यात्रा या शारीरिक परिश्रम नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म में कायिक (शारीरिक), मानसिक और वाचिक (मन और वाणी) तपस्या का एक अनुपम उदाहरण है। जब एक कांवड़िया कंधे पर कावड़ उठाकर जल लेने निकलता है, तो वह सांसारिक मोह-माया से परे होकर पूर्णतः शिवमय हो जाता है। श्रावण (सावन) मास में आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा भारत की प्राचीनतम और विशालतम लोक-धार्मिक परंपराओं में से एक है। हर वर्ष करोड़ों शिवभक्त (कांवड़िये) हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, वाराणसी, गोमुख, प्रयागराज आदि पवित्र स्थलों से गंगाजल भरकर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। सामाजिक जुड़ाव का माध्यम:- जहाँ पहले इस यात्रा में मुख्यतः साधु-संत या ढलती उम्र के लोग भाग लेते थे, वहीं आज इसमें 80 प्रतिशत से अधिक युवा वर्ग की भागीदारी है। यात्रा में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। विगत कुछ दशकों में यह यात्रा केवल व्यक्तिगत भक्ति या तीर्थाटन तक सीमित न रहकर एक विशाल सामाजिक, सांस्कृतिक जुड...

Rampyari Gurjar History: तैमूर लंग को खदेड़ने वाली भारत की अदम्य महिला योद्धा

रामप्यारी गुर्जर कौन थीं? जानिए 40 हजार महिला सैनिकों के साथ तैमूर लंग को हराने वाली वीरांगना का इतिहास:-  जिनके नेतृत्व में 40 हज़ार महिला सैनिकों ने तैमूर लंग को नाकों चने चबवा दिये थे।   रामप्यारी गुर्जर  भारतीय इतिहास में एक अल्पज्ञात (अनजाना) नाम है, परंतु उनकी वीरता की कहानी अद्वितीय है। अन्य हजारों वीर और वीरांगनाओं की भांति वह भी न जाने किन कारणों से इतिहासकारों की उपेक्षा का शिकार रही हैं। बीस वर्षीय रामप्यारी गुर्जर ने अपने साथ चालीस हज़ार अन्य महिला सैनिकों को लेकर सन् 1398 में मेरठ और हरिद्वार के क्षेत्र में तैमूर लंग पर ऐसे भयावह हमले किए थे कि वह भारत छोड़कर भागने को विवश हो गया, और फिर कभी इधर का रुख नहीं किया। तत्समय विभिन्न समुदायों और जातियों के लगभग अस्सी हज़ार योद्धाओं ने तैमूर लंग पर स्थान-स्थान पर हमले किए और उसकी सेना के बहुत बड़े भाग को नष्ट कर दिया। और इस प्रकार (मेरठ और हरिद्वार का युद्ध)  मेरठ, हरिद्वार और आसपास के समस्त भू-भाग को तैमूर द्वारा लुटने से बचा लिया। रामप्यारी गुर्जर कौन थीं? जानिए 40 हजार महिला सैनिकों के साथ तैमूर लंग को हरान...

मौलिक कर्तव्य क्या हैं? जानें भारत के 11 मौलिक कर्तव्य और उनका इतिहास

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य: इतिहास, महत्व और नागरिक दायित्व:- यद्यपि वर्ष 1950 में स्वीकृत हमारे संविधान में कर्तव्यों के विषय में कोई अधिक चर्चा नहीं हुई। किंतु वर्ष 1976 में, जिस समय देश पर आपातकाल लागू था, तत्कालीन कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया, जिसकी सिफारिश को आधार बनाकर 10 कर्तव्यों वाला 42वां संविधान संशोधन किया गया। बाद में वर्ष 2002 में एक और संशोधन द्वारा 11 वां कर्तव्य भी जोड़ा गया।  यद्यपि कर्तव्यों की पालना कराने की कोई बाध्यता नहीं है, और उन्हें न करने पर किसी प्रकार के दंड का प्रावधान भी नहीं है, किंतु यह अतिआवश्यक है कि सभी नागरिक कुछ आधारभूत कर्तव्यों का पालन अवश्य करें।   नागरिक कर्तव्य और अधिकार: समृद्ध राष्ट्र की नींव (सर्वोत्तम एवं संतुलित):- नागरिक अधिकार और नागरिक कर्तव्य, यह दोनों ऐसे हैं जैसे मनुष्य के दो पैर। दोनों बराबर चलेंगे तभी मनुष्य आगे चल पाएगा। इसी प्रकार अपना देश, समाज भी आगे तभी बढ़ पाएगा जब हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पूरी तरह ध्यान रखेंगे। इस समय पर ...

जानिए कौन थीं सरस्वती राजमणि? आज़ाद हिंद फौज की गुमनाम महिला गुप्तचर

वीरांगना सरस्वती राजमणि: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की गुप्तचर जासूस की अनकही कहानी   हम में से कितने लोगों ने सरस्वती राजमणि के बारे में सुना है? अधिकांश लोगों ने उनके बारे में कभी सुना भी नहीं है। जबकि वे आजाद हिंद फौज के लिए काम करने वाली सबसे कम उम्र की महिला गुप्तचर थीं। सरस्वती राजमणि का जीवन परिचय:- सरस्वती राजमणि का जन्म रंगून में हुआ था। उनके पिता रंगून के सबसे संपन्न भारतीयों में से एक थे। वे त्रिची की एक सोने की खान के मालिक थे।  सरस्वती राजमणि के पिता भी अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे। बार-बार अंग्रेजों द्वारा की जाने वाली धरपकड़ से बचने के लिए वे रंगून चले गए और वहीं बस गए। वहाँ से भी वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए निरंतर कार्य करते रहे।  सरस्वती राजमणि भी उनके पद चिह्नों पर चलकर देश को स्वतंत्र कराने में अपना योगदान देना चाहती थीं। उन्हें अपने परिवार से भी पूरा सहयोग मिला। सरस्वती राजमणि का जन्म 1927 में हुआ था। बाल्यकाल से ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विषय में सुना था। वास्तव में नेताजी ने ही उनका नाम सरस्वती रखा था...

Raja Prithu [राजा पृथु] - भारतीय प्रतिरोध की गाथा

राजा पृथु-1  राजा पृथु  कौन थे?  पृथु असम के राजा थे, जिन्होंने 1206 ईस्वी में बख्तियार खिलजी को बुरी तरह परास्त किया था। असम का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। रामायण, महाभारत, पुराण और अन्य शास्त्रों में असम को ' प्रागज्योतिषपुर ' के नाम से जाना गया है। कालांतर में इसका नाम ' कामरूप ' हो गया, यह नाम भी इतिहास में अनेक जगह आया है। निदानपुर और डूबी में मिले शिलालेखों के अनुसार नरकासुर, भगदत्त, वज्रदत्त और उनके वंशजों ने 3,000 वर्षो तक यहाँ राज्य किया। प्रयागराज में मिले समुद्रगुप्त के एक शिलालेख में कामरूप उसका एक सीमावर्ती राज्य था। अहोम राज्य आने के बाद से मानस नदी के पूर्व का सारा क्षेत्र 'असम' नाम से जाना जाने लगा। असम के एक जिले का नाम आज भी कामरूप है।   1206 ई. में मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने कामरूप पर आक्रमण किया था। खिलजी अपने साथ बारह हज़ार घुड़सवारों की एक बड़ी फौज लेकर आया था। तत्समय असम पर राजा पृथु का शासन था। राजा पृथु ने बख्तियार खिलजी को बुरी तरह परास्त किया। वह बड़ी मुश्किल से ही अपनी जान बचाकर भाग पाया। उसकी अधिकतर सेना भी इस अभियान में नष...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS?)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS? )  यह कार्यप्रणाली (Methodology) है,और कुछ नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का जो संगठन है, वह करता क्या है? वह व्यक्ति-निर्माण का काम करता है। क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार का परिवर्तन आज भी हम चाहते हैं। हमको भेद मुक्त समाज चाहिए, समतायुक्त समाज चाहिए, शोषण-मुक्त समाज चाहिए। समाज से स्वार्थ भी जाना चाहिए।  लेकिन यह जाना चाहिए,केवल ऐसा कहने से नहीं होगा। समाज का आचरण उदाहरणों की उपस्थिति में बदलता है। हमारे यहाँ आदर्श हैं,महापुरुषों की कोई कमी नहीं है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करनेवाले इस भूमि में आदिकाल से इस क्षण तक बहुत लोग हैं। लेकिन अपने सामान्य समाज की प्रवृत्ति क्या है? वह उनकी जयंती, पुण्यतिथि मनाता है। उनकी पूजा जरूर करेगा, उनके जैसा गलती से भी नहीं बनेगा।छत्रपति शिवाजी महाराज फिर से होने चाहिए, लेकिन मेरे घर में नहीं होने चाहिए, दूसरे के घर में होना चाहिए। कुछ वर्ष पहले रीडर्स डाइजेस्ट में एक अंग्रेजी वाक्य पढ़ा था, उसमें यह कहा था कि The ideals are like stars, which we never reach. आदर्श दूर ही रहते हैं। उ...