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Domain name system

डोमेन नेम सिस्टम ऐसा सिस्टम होता है जो विभिन्न वेब रिसोर्सेज को प्रयोग में लेने के लिए उनके आई.पी. ऐड्रेस को नाम देने का कार्य करता है।
जब ब्राउज़र के माध्यम से हम कोई डोमेन नेम ओपन करते हैं तो यह रिक्वेस्ट डोमेन नेम सर्वर के पास जाती हैं। डोमेन नेम सर्वर दिए गए डोमेन नेम के आधार पर IP उसका ऐड्रेस अपने डेटाबेस में ढूंढता है। जब IP एड्रेस मिल जाता है तो उस  IP ऐड्रेस को रिक्वेस्ट भेज दी जाती है। यह कहा जा सकता है की डोमेन नेम सर्वर इंटरनेट के लिए फोन बुक की तरह कार्य करता है।
 आवश्यकता के आधार पर विभिन्न ग्राहक को डोमेन नेम उपलब्ध कराने का कार्य ICANN (Internet Corporation for Assigned Names and Numbers) संस्था द्वारा किया जाता है।  इसके लिए ICANN एक डेटाबेस तैयार रखता  है, जिसे  रजिस्ट्री  कहा जाता है । इस डेटाबेस में अभी तक  बुक किए गए  सभी डोमेन नेम की एंट्री होती है। इस डेटाबेस को सर्च करने के लिए whois सर्विस का प्रयोग किया जाता है।
एक डोमेन नेम विभिन्न सेक्शनों में बटा हुआ होता है। उदाहरण के लिए www.rissshi.blogspot.com को लेते हैं यह तीन भागों में बटा हुआ है। इसमें तीसरा भाग .com लिखा है वह टॉप लेवल डोमेन(TLD) कहलाता है।
 इसके अतिरिक्त अन्य टॉप लेवल डोमेन निम्नानुसार हैं:
1. .aero - एयर ट्रांसपोर्ट सेवाओं हेतु
2. .com -  व्यवसायिक प्रयोग हेतु
3. .coop - कोपरेटिव्स  द्वारा उपयोग हेतु
4. .edu - शैक्षणिक संस्थाओं के प्रयोग हेतु
5. .gov - सरकारी प्रयोग हेतु
6. .mil - मिलिट्री सेवाओ प्रयोग हेतु
7. .mobi - मोबाइल डिवाइसेज द्वारा प्रयोग हेतु
8. .net - इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स  के प्रयोग हेतु
9. .org -  संस्थाओं हेतु
           
                विभिन्न देशों के लिए प्रमुख डोमेन 
1. .ca - कनाडा हेतु
2. .ch - स्विजरलैंड हेतु
3. .co - कोलंबिया हेतु
4. .in - इंडिया हेतु
5. .it -  इटली हेतु
6. .ly - लीबिया हेतु
6. .mu -  मॉरीशस हेतु

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