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SMTP Kya hai? - what is SMTP in hindi

आज हम  computers in hindi  मे SMTP Kya hai? ( what is SMTP in hindi) smtp ka full form kya hai - internet tools in hindi  के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- SMTP Kya hai? (what is SMTP in hindi):- यह प्रोटोकॉल ई - मेल मैसेज को सीधे सर्वर पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले सर्वर इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप्त कर सकते हैं । smtp ka full form kya hai:- simple mail transfer protocol  simple mail transfer protocol in hindi:- इंटरनेट प्रोटोकॉल नेटवर्क पर ई - मेल ट्रांसफर के लिए यह प्रोटोकॉल प्रयोग में लिया जाता है । ई - मेल क्लाइंट सॉफ्टवेयर ई - मेल मैसेज भेजने के लिए SMTP का प्रयोग करते हैं तथा मैसेज प्राप्त करने के लिए पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल ( POP ) या इंटरनेट मैसेज एक्सेस प्रोटोकॉल ( IMAP ) का प्रयोग करते हैं । SMTP    सर्वर  इसके लिए पोर्ट नंबर 25 का प्रयोग करते हैं ।  simple mail transfer protocol   ई - मेल मैसेज को सीधे   सर्वर  पर अपलोड कर देता है । स्टैटिक IP एड्रेस वाले   सर्वर  इस प्रोटोकॉल के माध्यम से मैसेज भी प्राप् कर सकते हैं ।

IEEE 802.11

IEEE 802.11 क्या होता है?( हिंदी में)

IEEE 802.11 वायरलेस लेन को implement करने के लिए एक स्टैंडर्ड स्टैंडर्ड्स का समूह है। सबसे पहले बनाया गया स्टैंडर्ड समूह 802.11 था जिसे सन 1997 में बनाया गया था। यह वायरलेस लेन की आवश्यकताओं, भौतिक स्ट्रक्चर  व सेवाओं आदि की व्याख्या करता है।  इसका मुख्य लक्ष्य  साधारण वायरलेस लैन बनाना होता है, जो कि समय bounded व asynchronous सेवाएं प्रदान करें।

डिसटीब्युटेड सिस्टम में कई सारे BSS (basic service set) जुड़े होते हैं जो मिलकर एक बड़े नेटवर्क का निर्माण करते हैं जिसे ESS (extended service set) कहा जाता है। इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड सिस्टम को पोर्टल के माध्यम से दूसरे लेन से जोड़ा जा सकता है। IEEE 802.11 में BSS एक  दूसरे पर निर्भर नहीं करते हैं, इसीलिए इन्हें IBSS (independent basic service set) कहा जाता है।IBSS कई सारे स्टेशनों  के बने होते हैं, तथा ये स्टेशन आपस में सीधे जुड़े होते हैं  इसमें  एक्सेस प्वाइंट की आवश्यकता  नहीं होती है तथा डाटा एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पर स्थानांतरित होता है।

Standards of IEEE 802.11 family
IEEE का प्रारंभिक वर्जन IEEE 802.11 था, उसके पश्चात जैसे-जैसे नवीन तकनीको का विकास होता गया वैसे वैसे इनके भी नए वर्जन अर्थात में संकरण विकसित होते गए।  इसके कुछ संकरण  की  संक्षिप्त व्याख्या  इस प्रकार हैं-
1. IEEE 802.11
2. IEEE 802.11 a
3. IEEE 802.11 b
4. IEEE 802.11 g

1. IEEE 802.11:-
IEEE का प्रारंभिक वर्जन IEEE 802.11 था। इसके समूह में हाल्फ डुप्लेक्स ओवर द ईयर की पूरी सीरीज है। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व स्तरीय  कम्युनिकेशन  को प्रदान करना है  इसीलिए  यह 2.4 Giz ISM बैंड रखता है  जो कि लगभग  प्रत्येक देश में  उपलब्ध होती है। इसकी डाटा रेट 1 Mbit प्रति सेकंड से 2Mbit प्रति सेकंड तक की होती है।

2. IEEE 802.11 a :-
जिस प्रकार वास्तविक स्टैंडर्ड 802.11 डाटा लिंक प्रोटोकोल तथा फेम फॉरमैट स्टैंडर्ड का उपयोग में लेता है उसी प्रकार  यह भी उपयोग करता है। इस स्टैंडर्ड को सन 1990 में मंजूदी दी गई थी। इसकी अधिकतम डाटा रेट 54mbps की होती है  तथा यह त्रुटि होने पर  त्रुटि कोड भी  बताता है।

3. IEEE 802.11 b :-
यहां स्टैंडर्ड भी माध्यम  उपयोग की  विधि का प्रयोग करता है  जो वास्तविक  स्टैंडर्ड  में प्रयोग की जाती  थी।  इसे स्टैंडर्ड की अधिकतम  डाटा रेट 11mbps की होती है। इस संकरण को सन  1999 में लागू किया गया था।

4. IEEE 802.11 g :-
यह भी 2.4 GHz बैंड में कार्य करता है  तथा यह  इसके वास्तविक स्टैंडर्ड  प्रथम संस्करण की भांति की ट्रांसमिशन विधि का प्रयोग करता है। यह फिजिकल लेयर पर 54mbps की गति से कार्य करता है। यह संकरण पूर्ण रूप से सन 2003 में लागू किया गया था।
 इसके अतिरिक्त इसके अन्य संकरण IEEE 802.11-2007, 802.11n, 802.11-2012, 802.11ac, 802.11ad आदि है।

Services of IEEE 802.11 family( इसकी सर्विसेज निम्नलिखित है):-
1. संदेश का वितरण:-
यह एक प्राथमिक सर्विसेज  है।  इसके द्वारा संदेश के फ्रेम्स को एक स्टेशन से दूर से स्टेशन पर भेजा जा सकता है। जब किसी फ्रेम को एक BSS से दूसरे BSS पर भेजा जाता है तो उस समय डिस्ट्रीब्यूटेेड सिस्टम का प्रयोग किया जाता है।

2. इंटीग्रेशन :- 
 इंटीग्रेशन सेवा के द्वारा IEEE पर डाटा को विभिन्न स्टेशनों के बीच में इंटीग्रेटेड रूप में ट्रांसफर किया जाता है। इस प्रक्रिया में वायर्ड लैैन को डिसटीब्युटेड सिस्टम से जोडा जाता है।

3. एसोसिएशन :-
किसी भी स्टेशन को वायरलेस लेन पर डाटा को ट्रांसमीट तथा रिसीव करने के लिए किसी विशेष BSS के एक्सेस प्वाइंट के साथ कनेक्शन बनाना होता है।

4.  पुनः एसोसिएशन:-
इसके द्वारा स्थापित एसोसिएशन को एक एक्सेस प्वाइंट से दूसरे एक्सेस प्वाइंट पर ट्रांसमिट किया जाता  है।

5.  ऑथेंटिकेशन:-
यह सर्विस स्टेशन को पहचानने के लिए प्रयोग में की जाती है।  इसके लिए यह  कहीं  फंक्शन लिटी  प्रदान करती है।  इसके लिए यह पब्लिक की  एंक्रिप्शन  स्कीम का प्रयोग करती है।  इसके अंतर्गत दोनों स्टेशनों  के ऑथेंटिकेशन को जाचा  जाता है तथा  सही  पाए जाने पर  ही उन दोनों के मध्य  कम्युनिकेशन प्रदान किया जाता है।

6. डी ऑथेंटिकेशन:-
जब दो स्टेशनों के मध्य ऑथेंटिकेशन की जांच की जा रही होती है, गलत ऑथेंटिकेशन पाए जाने पर यह सर्विस उसे डी ऑथेंटिकेट कर देती है फल स्वरूप कम्युनिकेशन नहीं होने दिया जाता है।

7. गोपनीयता:-
गोपनीयता के लिए भी यह एक अच्छी सुविधा प्रदान करती है। इसके लिए यह ऑथेंटिकेशन व डि ऑथेंटिकेशन  का प्रयोग किया जाता है।

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