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real time operating system in hindi - रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम

 आज हम computer course in hindi मे हम real time operating system in hindi ( रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम) के बारे में जानकारी देते क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं-

real time operating system in hindi ( रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम):-

real time operating system ( रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम) ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर हार्डवेयर को manage करता है तथा कम्प्यूटर यूजर और कम्प्यूटर हार्डवेयर के बीच एक interface को established करता है । प्रमुख reasons से ऑपरेटिंग सिस्टम का अध्ययन करना बहुत आवश्यक है किसी भी ( task ) को पूरा करने के लिए यूजर , ऑपरेटिंग सिस्टम के माध्यम से कम्प्यूटर से interact करता है क्योंकि ऑपरेटिंग सिस्टम ही यूजर और कम्प्यूटर के बीच interface को established करता है और ऑपरेटिंग सिस्टम ही काफी नजदीक से यूजर को कम्प्यूटर की internal functions को समझने में हमारी सहायता करता है । 
ऑपरेटिंग सिस्टम की कई concepts और techniques का उपयोग अन्य दूसरे applications में भी होता है ।
real time operating system in hindi - रियल टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम


1. सिस्टम कॉल ( System Call ):-

 हम यह आसानी से समझ सकते हैं । system calls प्रोसेस तथा ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच इन्टरफेस प्रदान करते हैं । जब कोई प्रोग्राम रन कर रहा होता है तो उसे प्रोसेस कहते हैं । पहले सिस्टम कॉल्स को Assembly Language में लिखा जाता था और इस समय आजकल ये High - Level - Languages जैसे , C , C ++ , Pascal , Perl इत्यादि में भी लिखे जा सकते हैं । यह C , C ++ , Pascal जैसी भाषाओं का प्रयोग सिस्टम प्रोग्रामिंग के लिए भी होता है जो पहले Assembly Language में हुआ करती थी । लेकिन C , C ++ तथा Pascal जैसी भाषाओं में लिखे गए सिस्टम कॉल्स का प्रयोग pre define function and subroutine calls के जैसे होता है । लेकिन यहाँ पर सिस्टम कॉल का प्रयोग किस तरह होता है हम एक प्रोग्राम पर करते हैं जिसमें एक फाइल से डेटा को पढ़कर दूसरे फाइल में कॉपी करता है । इस Interactive System में हमें ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए Generate the following system calls करना होता है:-
1 . इसमें दो फाइलों का नाम इनपुट करने के लिए स्क्रीन पर मैसेजेज प्रदर्शित करने होंगे । इनमें एक सोर्स फाइल का नाम तथा दूसरा डेस्टिनेशन फाइल का नाम होगा । 
2. सोर्स फाइल को ओपन करना होगा तथा डेस्टिनेशन मतलब आउटपुट फाइल को क्रिएट करना होगा । और यदि सोर्स फाइल नहीं होगी अथवा उस पर एक्सेस की अनुमति नहीं होगी या डेस्टिनेशन फाइल के नाम से पहले ही कोई फाइल बनी होगी , तो error messages प्रदर्शित होता है। 
3. यदि इसमें सोर्स फाइल ओपन हो जाएगी तथा Create destination file हो जाएगी तो सोर्स फाइल को फाइल की समाप्ति मतलब  End of File तक डेटा को पढ़ते हुए डेस्टिनेशन फाइल में लिखी जाएगी । सोर्स फाइल से डेटा को पढ़ने की प्रक्रिया तथा डेस्टिनेशन फाइल में डेटा को लिखने की प्रक्रिया में सभी Possible Error conditions जैसे Parity errors या hardware failures को चेक करते हुए Read / write operation के status को प्रदर्शित करता है । 
4. इसमें पूरी फाइल के कॉपी हो जाने के बाद दोनों फाइलों को Close करनी होगी तथा कॉपी प्रोसेस को terminate करनी होगी । इस प्रकार हम एक साधारण ( Copy ) प्रोग्राम बनाने के लिए हमें ऑपरेटिंग सिस्टम से contract करने की आवश्यकता होती है । फाइल को कॉपी करने के लिए ऊपर सिस्टम कॉल्स को ' C ' लैंग्वेज में इस तरह लिखा जा सकता है।

types of system call :-

( i ) प्रोसेस कंट्रोल ( Process control ) 
( ii ) फाइल मैनेजमेंट ( File Management ) 
( iii ) डिवाइस मैनेजमेंट ( Device Mangement ) 
( iv ) इनफॉर्मेशन मैनेजमेंट ( Information Management ) 
( v ) कम्यूनिकेशन्स ( Communications )

( i ) प्रोसेस कंट्रोल ( Process control ) :-

किसी भी प्रोग्राम के running status को प्रोसेस ( process ) कहा जाता है । किसी भी रनिंग प्रोग्राम के execution को या उसके एक्जक्यूशन के end पर या एक्जक्यूशन के बीच से ही मतलब Abort करके halt किया जा सकता है । और यदि कोई सिस्टम कॉल किसी रन कर रहे प्रोग्राम मतलब प्रोसेस को बीच में ही abort कर , उसके execution को terminate करता है , तो ऑपरेटिंग सिस्टम , dump of memory को लेकर डिस्क में लिख देता है तथा एक Generate error message करता है । डिस्क में लिखा गया memory dump , Debugger द्वारा समस्या के कारण को assured करने के लिए examine किया जाता है ।
प्रोसेस के नॉर्मल या abnormal दोनों ही terminate की circumstances में ऑपरेटिंग सिस्टम कमाण्ड इन्टरप्रेटर को कंट्रोल ट्रान्सफर करता है । इसके बाद Command Interpreter अगले कमाण्ड को रीड करता है । Interactive System में command interpreter अगले कमाण्ड को रीड कर execution करता है जबकि Batch System में Command Interpreter पूरे जॉब को terminate कर अगले जॉब को रीड कर execution करता है।

( ii ) फाइल मैनेजमेंट ( File Management ) :-

इस category के अन्तर्गत वैसे सिस्टम कॉल आते हैं जो फाइल को क्रिएट , डिलीट , कॉपी तथा फाइल के attributes को देखने तथा सेट करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं । किसी भी फाइल को क्रिएट करने के लिए जहाँ सिस्टम कॉल में फाइल के नाम को Specified करने की आवश्यकता होती है , वहीं फाइल को डिलीट करने के लिए फाइल के नाम के साथ - साथ उसके attributes को भी चेक करने की जरूरत पड़ती रहती है । किसी फाइल को क्रिएट करने के पश्चात् ही उसे ओपन , रीड या राइट या रिवाइन्ड किया जा सकता है । और अन्त में फाइल को close करने की आवश्यकता होती है । ये सभी प्रक्रियाएँ सिस्टम कॉल के द्वारा पूरी की जा सकती हैं ।

( iii ) डिवाइस मैनेजमेंट ( Device Mangement):-

जब कोई प्रोग्राम रन करता है तो उसे fully execute करने के लिए additional सिस्टम रिसोर्सेस की आवश्यकता हो सकती है और ये additional सिस्टम रिसोर्सेस , मेमोरी सेकण्डरी स्टोरेज डिवाइस , और फाइल्स इत्यादि हो सकते हैं । यदि सिस्टम रिसोर्सेस उपलब्ध होते हैं तो ये प्रोग्राम को Grant कर दिए जाते हैं तथा control प्रोग्राम को return कर दिया जाता है ; अन्यथा प्रोग्राम को सिस्टम रिसोर्सेस के लिए तब तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है , जब तक कि सिस्टम रिसोर्सेस उपलब्ध न हो जाएँ । इस files को abstract या वरचुअल डिवाइसेस ( virtual devices ) भी कहा जाता है । इसीलिए कई डिवाइसेस के लिए उन्हीं सिस्टम कॉल्स की आवश्यकता होती है । जिस प्रकार फाइल को ओपन और क्लोज करने के लिए open और close नामक सिस्टम कॉल की आवश्यकता होती है उसी प्रकार डिवाइस को allocate करने के लिए तथा release करने के लिए allocate तथा release नाम ( fictitious name ) सिस्टम कॉल्स की आवश्यकता होती है । जिस प्रकार साधारण फाइल को ओपन कर read write तथा reposition इत्यादि किया जा सकता है ठीक उसी प्रकार डिवाइस को request कर यदि allocate हो जाता है तो read , write तथा reposition किया जा सकता है । वास्तव में फाइल्स और LIVO डिवाइसेस में इतनी समानता है कि कई ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे MS - DOS तथा UNIX में फाइल्स और डिवाइसेस को एक ही स्ट्रक्चर में merge कर दिया गया है । MS - DOS तथा UNIX ऑपरेटिंग सिस्टम में IVO डिवाइसेस को खास फाइल नेम्स दिए गये होते है ।

( iv ) इनफॉर्मेशन मैनेजमेंट ( Information Management ):-

 इस category में ऐसे सिस्टम कॉल्स आते हैं , जो केवल यूजर के प्रोग्राम और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच इनफॉर्मेशन का transter करते हैं । जैसे सिस्टम का वर्तमान समय और date , ऑपरेटिंग सिस्टम के edition की संख्या डिस्क या मेमोरी में उपलब्ध free space इत्यादि । इस category के अन्तर्गत वे सिस्टम कॉल्स भी आते हैं जो ऑपरेटिंग सिस्टम से प्रोसेसेस के current status को पढ़कर यूजर को बताते हैं तथा उन्हें reset करने की सुविधा प्रदान करते हैं । ( UNIX ) का ps कमाण्ड इस श्रेणी के सिस्टम कॉल का एक अच्छा उदाहरण होता है ।

( v ) कम्यूनिकेशन्स ( Communications ) :-

ये 2 प्रकार के होते हैं:-
1. मेसेज - पासिंग मॉडल ( Message - Passing Model ) 
2. शेयर्ड - मेमोरी मॉडल ( Shared - Memory Model ) 
interprocess - communication की मेसेज - पासिंग मॉडल में ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा एक ऐसी सुविधा प्रदान की जाती है , जिसके द्वारा इनफॉरमेशन का exchange होता रहता है । इससे पूर्व कि दो प्रोसेस के बीच कम्यूनिकेशन प्रारम्भ हो , एक connection definitely से ओपन होना चाहिए तथा इसके लिए दूसरे communicator का नाम ज्ञात होना चाहिए चाहे वह दूसरा प्रोसेस उसी CPU से सम्बन्धित हो या फिर वह इन प्रोसेस कॉम्यूनिकशन नेटवर्क के किसी अन्य कम्प्यूटर से सम्बन्धित हो । किसी भी नेटवर्क में प्रत्येक कम्प्यूटर का एक Host Name होता है जो Get hostid और getprocessname ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए identifiers के रूप में इस प्रकार से translate किए जाते हैं कि ऑपरेटिंग सिस्टम इन identifiers के द्वारा hstname और processname को refer कर सके । इसके बाद ये identifiers open और close सिस्टम कॉलस जो files system द्वारा प्रदान किए जाते हैं को pass कर दिए जाते हैं जिससे इसके पश्चात् recipient process , accept connection नामक सिस्टम कॉल द्वारा कम्यूनिकेशन की permission देता है । ज्यादातर प्रोसेसेस जो कनेक्शन्स को receive करते हैं , डेमॉन्स ( Daemons ) कहे जाते हैं । यह daemons सिस्टम प्रोग्राम्स होते हैं तथा receiving daemon को server कहा जाता है । रिसीविंग डेमॉन सिस्टम कॉल्स के द्वारा मैसेजेज का exchange करते हैं । close connection , सिस्टम कॉल कम्यूनिकेशन्स को terminate करता रहता है। 
इस Shared_memory में प्रोसेसेस map memory सिस्टम कॉल्स का प्रयोग कर मेमोरी के उन regions को एक्सेस करते हैं जो अन्य प्रोसेसेस के Possesion में होता है । यह ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रोसेस द्वारा दूसरे प्रोसेस की मेमोरी को एक्सेस करने से रोकने की कोशिश करता है । परन्तु shared memory में सभी प्रोसेसेस के इस restriction को हटाने के लिए agree होने की जरूरत पड़ती है । और इसके बाद प्रोसेसेस , shared memory areas में डेटा को रीड तथा राइट कर इनफॉर्मेशन को शेयर भी कर सकते हैं । डेटा का form तथा location , प्रोसेसेस के द्वारा सुनिश्चित किया जाता है , न कि ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा । इसमें Message_passing और Shared_memory नामक दोनों ही मेथड्स , ऑपरेटिंग सिस्टम्स में प्रोसेस कॉम्यूनिकेशन के लिए प्रयोग किए जाते हैं और कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम्स तो दोनों ही मेथड्स का प्रयोग करते हैं । Message_passing मॉडल का प्रयोग तब उपयोगी होता है , जब कम संख्या में डेटा exchange करने की आवश्यकता होती है और Message_passing मॉडल को इन्टर - कम्प्यूटर कम्यूनिकेशन के लिए Shared_memory मॉडल की तुलना में implement करना और आसान है । शेयर्ड मेमोरी , प्रोसेस कम्यूनिकेशन को maximum speed प्रदान करती है क्योंकि शेयर्ड मेमोरी मॉडल द्वारा प्रोसेस कम्यूनिकेशन एक ही कम्प्यूटर के अन्दर होता है ।

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