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Recovery technique in dbms । रिकवरी। recovery in hindi

 आज हम Recovery facilities in DBMS(रिकवरी)

 के बारे मे जानेगे रिकवरी क्या होता है? और ये रिकवरी कितने प्रकार की होती है? तो चलिए शुरु करतेे हैं-

Recovery in hindi( रिकवरी) :-

यदि किसी सिस्टम का Data Base क्रैश हो जाये तो उस Data को पुनः उसी रूप में वापस लाने अर्थात् उसे restore करने को ही रिकवरी कहा जाता है । 

recovery technique(रिकवरी तकनीक):-

यदि Data Base पुनः पुरानी स्थिति में ना आए तो आखिर में जिस स्थिति में भी आए उसे उसी स्थिति में restore किया जाता है । अतः रिकवरी का प्रयोग Data Base को पुनः पूर्व की स्थिति में लाने के लिये किया जाता है ताकि Data Base की सामान्य कार्यविधि बनी रहे । 
डेटा की रिकवरी करने के लिये यह आवश्यक है कि DBA के द्वारा समूह समय पर नया Data आने पर तुरन्त उसका Backup लेना चाहिए , तथा अपने Backup को समय - समय पर update करते रहना चाहिए । यह बैकअप DBA ( database administrator ) के द्वारा लगातार लिया जाना चाहिए तथा Data Base क्रैश होने पर इसे क्रमानुसार पुनः रिस्टोर कर देना चाहिए
Types of recovery ( रिकवरी के प्रकार ):-
1. Log Based Recovery
2. Shadow paging 
Restore

1. Log based Recovery: -

इस प्रकार की रिकवरी रिकॉर्डस के Login पर आधारित होती है । इन रिकॉर्ड्स को Log रिकॉर्ड भी कहा जाता है जब भी कोई transaction प्रारम्भ होता है तो प्रारम्भिक Log को record कर लिया जाता है । इसके अन्तर्गत Start flag a trans action identifier होता है । data Base में जब कोई भी data संग्रहित करने या उसे अपडेट करने का कार्य किया जाता है तो log record निम्नलिखित को संग्रहित करता है 
1. Transaction की पहचान संख्या 
2. वह डेटा जिस पर कार्य किया जा रहा है 
3. उस data की पुरानी Value 
4. उस डेटा की नई Value 
5. log record का प्रकार
एक ही data Base के एक log record के पास अन्य log record क पॉइंटर होता है जो कि अलग - अलग log रिकॉर्ड को पाइंट करता है । जब भी Commil या rollBack दिया जाता है तो Records स्थायी रूप से संग्रहित हो जाते हैं । log Record एक फाईल में संग्रहित होते हैं जिसे log file कहा जाता है । इन log फाईलों में वर्तमान Backup रखा जाता है । यह कार्य Data Base के द्वारा स्वतः किया जाता है । इस प्रकार का बैकअप प्रयोगकर्ता को लेने की आवश्यकता नहीं होती है ।
Data Base को पूर्णत : Restore करने के लिये DBA पहले समस्त offline Backup को Restore करता है तथा उसके बाद समस्त ऑनलाईन Backup को Restore करता है , इससे log फाईलें अपनी पूर्व की स्थिति में आ जाती हैं । Data Base log file व data को संग्रहित करता है । log फाईलों में Transcation ( ट्रांजेक्शन ) के विवरण का बैकअप रखा जाता है तथा data फाईलों में उससे संबंधित वास्तविक data को रखा जाता है । इसके अन्तर्गत मुख्यतः दो विधियाँ अपनायी जाती है 
 ( i ) Deferred update 
( ii ) Immediate update

2. Shadow paging:-

तार्किक रूप से data Base एक निश्चित size के Block में बंटा होता है जिन्हें pages कहा जाता है । Database तार्किक रूप में विभाजन होता है इनका साईज Data Base पर आधारित होता है । एक data Base में कई pages हो सकते हैं जिनकी क्रम संख्या एक से प्रारम्भ होती है । data page किसी विशिष्ट क्रम में संग्रहित नहीं होते हैं । इन्हें ढूँढने के लिये page table का use किया जाता है । एक ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया के द्वारा दो प्रकार के pages को बनाया जाता है । 
( 1 ) Current 
( 2 ) Shadow
जब एक ट्रांजेक्शन प्रारम्भ होता है तो दोनों Pages की Table Identical हो जाती हैं ट्रांजेक्शन के दौरान shadow page में कोई बदलाव नहीं आता है । कोई data संग्रहित करने वाले operation से current page में बदलाव लाये जा सकते हैं । data page को ढूँढने के लिये समस्त ट्रांजेक्शन Current Page Table का Use करते हैं । Shadow Page स्थायी माध्यम में संग्रहित किया जाता है । स्थायी माध्यम से अभिप्राय स्थायी Memory से है । इससे यह फायदा है कि यदि किसी ट्रांजेक्शन के दौरान सिस्टम फेल हो जाये तो data Base को रिकवर किया जा सके । Current पेज अस्थायी मैमोरी में संग्रहित किया जाता है यदि सिस्टम फेल हो जाये तो ऐसी स्थिति में वह data स्वत : ही delete हो जाएगा तथा undo की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।


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