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boolean algebra in hindi

Internet security in hindi

 आज हम computers in hindi मे internet security in hindi -  Internet tools in hindi के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- 

what is internet security in hindi:-

internet security मे नेटवर्क(नेटवर्क क्या है) कम्यूनिकेशन में डेटा का काफी आदान प्रदान होता है । डेटा में व्यक्तिगत डेटा , फाइनेंशियल डेटा आदि भी होते हैं । ऐसे डेटा के गलत हाथों में पहुंचने पर उसके गलत इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ जाती है । 
डेटा को सुरक्षित रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि उसे किस प्रकार के खतरे हैं , तभी उसे सुरक्षित रखने के बारे में सोचा जा सकेगा ।

Theft of Identity:-

नेटवर्क (नेटवर्क क्या है) पर विभिन्न व्यक्तियों की बातचीत के समय उनकी पहचान ( यूजरनेम , पासवड ) को गलत प्रयोग के लिए चुरा लेने का खतरा बना रहता है । 

Phishing:- 

कोई हैकर अपनी पहचान छुपा कर किसी अन्य व्यक्ति के रूप में यूजर्स से अतिरिक्त जानकारी मांग कर उसे ठग सकता है । इसके वह लिए यूजर को अतिरिक्त फायदे पहुंचाने का लालच देता है । 

Unauthorized Recording:- 

नेटवर्क(नेटवर्क क्या है) पर किए गए कम्यूनिकेशन को रिकॉर्ड कर उसे बाद में गलत उपयोग में लेने का खतरा रहता है।

Data Manipulation:-

Data Manipulation किसी अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा कम्यूनिकेशन के दौरान आदान प्रदान किए जाने वाले डेटा में छेड़छाड़ किए जाने का भय रहता है । 

Delay in Services:-

ऐसी सेवा जिसमें समय काफी महत्वपूर्ण हो , में नेटवर्क(नेटवर्क क्या है) के कारण देरी होनी की संभावना रहती है।

Remedies in hindi(बचाव):-

ऐसे खतरों से बचने के लिए हमें सुरक्षा से संबंधित कुछ उपाय करने चाहिए । ऐसे उपायों को हम इंटरनेट सिक्योरिटी के नाम से जान सकते हैं । इंटरनेट सिक्योरिटी के लिए हम कुछ टूल्स तथा सावधानियों का प्रयोग कर सकते हैं । 
ऐसे ही कुछ टूल्स का use करते हैं : 

एंटीवायरसः-

ऐसे सॉफ्टवेयर इंटरनेट के माध्यम से आने वाले वायरसों से सुरक्षा प्रदान करते हैं । इन्हें समय - समय पर अपडेट करते रहना चाहिए , ताकि नए वायरसों से भी सुरक्षा मिल सके ।

एंटी स्पायवेयरः-

स्पायवेयर ऐसा प्रोग्राम है जो यूज़र के कम्प्यूटर पर इंस्टॉल होकर यूज़र की मर्जी के बिना उसकी जानकारियां चुराता रहता है । स्पायवेयर यूजर के कम्प्यूटर की सैटिंग भी उसकी जानकारी के बिना बदल देता है , जो कि कम्प्यूटर की स्पीड कम कर देता है , होम पेज बदल देता है । एंटी स्पायवेयर ऐसे प्रोग्राम को इंस्टॉल होने से रोक देता है । 

फायरवॉलः-

यह ऐसा प्रोग्राम है जो यूजर के कम्प्यूटर पर इंटरनेट के माध्यम से अनाधिकृत पहुंच को रोक देता है । फायरवॉल हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर  दोनों माध्यमों से प्रयोग में लिया जा सकता है । इसे नेटवर्क(नेटवर्क क्या है) में प्रयोग में आने वाली डिवाइसेज जैसे राउटर्स , सर्वर , आदि पर इंस्टॉल किया जा सकता है । 
चूंकि यह इंटरनेट से प्राप्त होने वाले पैकेट तथा भेजे जाने वाले पैकेट्स की जांच करता है , अतः इस कारण से नेटवर्क (नेटवर्क क्या है) की स्पीड थोड़ी कम हो जाती है । बड़ी कंपनियां फायरवॉल का प्रयोग इंटरनेट तथा इंट्रानेट के बीच में करती है । इससे वह हैकर्स को कंपनी के आंतरिक नेटवर्क(नेटवर्क क्या है) तक पहुंच से रोक देती है ।
पेरेंटल कंट्रोलः 
यह ऐसा प्रोग्राम होता है जो बच्चों के लिए unusefull कंटेंट display नहीं होने देता है । ऐसे टूल के माध्यम से मुख्यतः कार्य किए जा सकते हैं : 
● कंटेंट फिल्टरिंग : उम्र के अनुसार कंटेट पर नियंत्रण । 
● यूजेज कंट्रोलः प्रयोग की समय सीमा तय करने के लिए ।

SSL in hindi(Secure Socket Layer in hindi):-

 Secure Socket Layer प्रोटोकॉल का प्रयोग प्राइवेट डॉक्यूमेंट्स को इंटरनेट के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित भेजने के लिए किया जाता है । यह प्रोटोकॉल ऐसा cryptographic सिस्टम प्रयोग में लेता है जिसमें डेटा को encrypt करने के लिए दो प्रकार की keys का प्रयोग किया जाता है । इन दो keys में से एक public key होती है जो सभी को पता होती है . तथा दूसरी private key होती है जो सिर्फ डेटा प्राप्तकर्ता को पता होती है।
इस प्रकार encrypt किए गए डेटा को पढ़ने के लिए private key की आवश्यकता होती है । इस private key को डेटा पर apply करते हुए डेटा को decrypt किया जा सकता है । चूंकि private key प्रत्येक के पास ना होकर सिर्फ संबंधित प्राप्तकर्ता के पास ही होती है , अतः इस माध्यम से भेजा गया डेटा कोई अन्य नहीं पढ़ सकता है । 
कई वेबसाइट इस प्रोटोकॉल को यूजर संबंधी गोपनीय जानकारी ( जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर ) प्राप्त करने के लिए प्रयोग में लेती है । जहां यह तकनीक प्रयोग में ली जाती है वहां http : की जगह https : का प्रयोग देखा जा सकता है।




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