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इंटरनेट क्या है - what is internet in hindi

आज हम internet technology in hindi मे हम what is internet in hindi (इंटरनेट क्या है) के बारे में जानकारी देते क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- 

what is internet in hindi (इंटरनेट क्या है):-

Introduction to internet in hindi:-

present में डाटा और सूचना के collection व management के लिए computer system एक तीव्र एवं सरल साधन है । computer system को परस्पर जोड़कर सूचनाओं का आदान - प्रदान करने के लिए कम्प्यूटर नेटवर्क तैयार किया जाता है , जिसकी सहायता से आजकल अनेक कम्प्यूटर user और प्रोग्रामर human intelligence का use एक साथ कर सकते हैं । वे एक ही समस्या का solution , अलग - अलग कम्प्यूटर में कार्य करके प्राप्त करते हैं और डाटा , सूचना और findings का परस्पर आदान - प्रदान कर सकते हैं । यह कम्प्यूटर नेटवर्क एक building तक ही सीमित नहीं होता है आजकल सम्पूर्ण विश्व के कम्प्यूटर भी नेटवर्क पर जुड़ सकते हैं ।

कम्प्यूटर नेटवर्क से सभी प्रकार की संस्थाओं , कारखानों और शोध संस्थानों की सूचना प्रक्रिया तीव्र और low cost हो जाती है । दुनिया भर के कम्प्यूटरों के Network को इंटरनेट की संज्ञा दी गई है । 
इंटरनेट का वर्तमान विकसित रूप , सन् 1960 से अब तक लगातार नेटवर्किंग के विकास का परिणाम है इंटरनेट को " नेटवर्कों का नेटवर्क " भी  बोला जाता है । यह एक संदेशों के आदान - प्रदान की universal system है । यह लगातार बढ़ते community environment में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । वैज्ञानिक , विद्यार्थी , अनुसंधायक चिकित्सक , सरकारी संस्थान , सभी बड़ी कम्पनियाँ और सभी उपभोक्ता इस समुदाय में सम्मिलित हैं।
इंटरनेट को एक परिभाषा की सहायता से समझना कठिन है , सरलता के लिए इसे " नेटवकों का नेटवर्क " कहा जा सकता है । इंटरनेट , हजारों कम्प्यूटर नेटवर्कों का नेटवर्क है । इन नेटवकों में प्रत्येक नेटवर्क और प्रत्येक कम्प्यूटर , कुछ rules के अनुसार परस्पर सूचनाओं का exchange करते हैं । इंटरनेट के हजारों नेटवकों में सूचनाओं के planned exchange के लिए rules को प्रोटोकॉल ( Protocol ) कहते हैं । 
इंटरनेट के ये multifunctional computer और Miscellaneous computers network प्रायः दो प्रोटोकॉलों की सहायता से जुड़े हुए हैं । विश्व में इंटरनेट के कम्प्यूटरों और नेटवर्कों को जोड़ने वाले प्रोटोकॉल हैं-

Types of Protocol:-

Transmission Control Protocol ( TCP ) और
Internet Protocol ( IP ) ।

History of internet in hindi (इंटरनेट का इतिहास):-

इंटरनेट का वर्तमान स्वरूप एक बार में invention नहीं हुआ है , वास्तव में यह नेटवर्किंग के निरन्तर development का परिणाम है । इंटरनेट का प्रारम्भ 1960 के दशक में अमेरिकी सरकार के एक प्रोजेक्ट ARPANET ( Advanced Research Project Agency Network ) से हुआ । इस दशक में शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी रक्षा विभाग ( DoD Department of Defence ) , न्यूक्लिअर युद्ध की Problematic से था । रक्षा विभाग में पारम्परिक सूचना तंत्र के नेटवर्क में अविश्वसनीयता की समस्या थी अमेरिकी रक्षा विभाग ने ARPA को इस समस्या का समाधान खोजने का कार्य सौंपा । लेकिन एजेन्सी ARPA के पास कोई वैज्ञानिक और प्रयोगशाला नहीं थी , वास्तव में यह पेन्टागन द्वारा संचालित कम बजट वाला छोटा सा Office था । विभिन्न grants की सहायता से इस एजेन्सी ने रक्षा विभाग को Subnet और Host Computers के द्वारा जोड़ने का निर्णय लिया । कई संचार लाइनों के द्वारा जुड़े मिनीकम्प्यूटरों के समूह को  Subnet कहा गया । सबनेट के इन मिनीकम्प्यूटरों को IMP ( Interface Message Processor ) कहते थे । एजेन्सी ARPA ने अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों , शोध प्रयोगशालाओं और सैनिक प्रयोगशालाओं को इस नेटवर्क से परस्पर जोड़ दिया था , जिसे ARPANET कहा गया ।
ARPANET नेटवर्क के प्रत्येक node पर एक IMP मिनीकम्प्यूटर और एक होस्ट कम्प्यूटर एक ही कमरे में स्थित होते थे । IMP और होस्ट कम्प्यूटर एक छोटे से तार से जुड़े रहते थे । होस्ट कम्प्यूटर इससे जुड़े IMP को 8063 बिट्स तक का डाटा भेज सकता था और IMP , इस संदेश को 1008 बिट्स के पैकेटों में divider करके destination की ओर आगे बढ़ाता था । इस प्रकार यह Subnet सबसे पहला इलेक्ट्रोनिक स्टोर - फॉरवर्ड - पैकेट - स्विचिंग ( Electronic Store - Forward - Packet - Switching ) नेटवर्क था । सभी IMPs को टेलीफोन कम्पनियों द्वारा लीज पर दी गई 56 - kbps की लाइनों के माध्यम से परस्पर जोड़ा गया था । 
सन् 1968 में ARPA ने BBN नामक एक कम्पनी से ARPANT के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार करवाया । इस सॉफ्टवेयर के दो भाग थे - सबनेट और होस्ट । इस सॉफ्टवेयर के इन भागों में डाटा आदान - प्रदान के अनेक नियमों का पालन होता था , जिन्हें प्रोटोकॉल कहा जाता था , जैसे , दो IMPs के मध्य IMP IMP प्रोटोकॉल |
दिसम्बर 1969 से सितम्बर 1972 तक ARPANET नेटवर्क में लगातार अनेक नोड सम्मिलित होते गए , जैसे- SRI , UCLA , UCSB , Utah विश्वविद्यालय , BBN आदि ।
इसके बाद सैटेलाइट नेटवर्क और पैकेट रेडियो नेटवर्क का एक प्रयोग किया गया । इस प्रयोग में कैलीफोर्निया की सड़क पर चलते हुए एक ट्रक में बैठकर एक researcher ने लंदन में स्थित कम्प्यूटर में संदेश भेजकर इस दूरस्थ कम्प्यूटर पर कार्य किया था । इस प्रयोग में कैलीफोर्निया में चल रहे ट्रक में से SRI नोड तक संदेश भेजने के लिए पैकेट रेडियो नेटवर्क को माध्यम बनाया गया , यहाँ से संदेश ARPANET के माध्यम से ईस्ट कोस्ट नामक स्थान पर भेजा गया और इसके बाद वहाँ से संदेश को उपग्रह नेटवर्क के माध्यम से लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में स्थित कम्प्यूटर पर sent किया गया ।
 इस प्रयोग से यह सिद्ध हो गया था कि अनेक प्रकार के नेटवकों की स्थिति में ARPANET प्रोटोकॉल ठीक प्रकार से काम नहीं करता है । अनेक नेटवर्कों के adjustment की समस्या को दूर करने के लिए सन् 1974 में Cert और Cahn नामक वैज्ञानिकों ने TCP / IP मॉडल और प्रोटोकॉल का आविष्कार किया TCP / IP विशेष रूप से internetworks पर communication के लिए विकसित किया गया था । यह एक महत्वपूर्ण आविष्कार था क्योंकि आज तक भी इंटरनेट में TCP / IP की विशेष भूमिका बनी हुई है ।

what is internet in hindi (इंटरनेट क्या है):-

TCP / IP के आने से ARPANET नेटवर्क से जुड़ने वाले नेटवर्क और users की संख्या तीव्रता बढ़ती गई और इस कारण TCP / IP को 1 जनवरी सन् 1983 को एक official protocol मान लिया गया था । जब NSFNET और ARPANET नेटवकों परस्पर Interconnect हो गये तो user connections की संख्या तीव्रता से बढ़ी । अनेक क्षेत्र नेटवर्क जुड़ते गये और कनाडा , यूरोप और पेसिफिक के नेटवर्क में कनेक्शन हो गया । अमेरिका में इंटरनेट का प्रसार केवल सरकारी खर्चे पर करने में अधिक सफलता नहीं मिल रही थी , इसलिए इस क्षेत्र में व्यावसायिक संस्थानों जैसे IBM और MCI कम्पनियों के लिए द्वार खोले गये । परिणामस्वरूप 45 Mbps और 3 Gbps ( Giga bits per second ) की डाटा संचरण गति की बैकबोन का इन्फॉर्मेशन सुपरहाइवे तैयार हुआ । भारत में पहले VSNL ( Videsh Sanchar Nigam Limited ) और बाद में BSNL ( Bharat Sanchar Nigam Limited ) ने इंटरनेट कनेक्शन देकर ISP ( इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई , जिससे देश में इंटरनेट का विकास हुआ । इस प्रकार सन् 1990 के दशक में कई commercial networks ने अपने इंटरनेट एक्सचेंज और gateway स्थापित करके इंटरनेट पर व्यापार करना प्रारम्भ कर दिया था । जनवरी 1992 में इंटरनेट के प्रचार और प्रसार के लिए एक Internet Society का गठन हुआ । सन् 1993 में NSF ने internet services प्रदान करने वाली एक संस्था InterNIC तैयार की ।
सन् 1985 के दौरान इस बढ़ते हुए नेटवर्कों के नेटवर्क का नाम इंटरनेट हो गया था । इंटरनेट से जुड़ने वाली sites की संख्या शीघ्रता से बढ़ने लगी और यह संख्या सन् 1987 तक 10,000 और सन् 1989 तक 1,00,000 हो गई । सन् 1990 तक इंटरनेट में 3,000 नेटवर्क और 2,00,000 कम्प्यूटर थे ।
सन् 1992 में 10 लाख वाँ होस्ट जुड़ा था । इसके बाद 1995 तक अनेक backbones , सैंकड़ों क्षेत्र नेटवर्क , हजारों LANs , लाखों होस्ट , और करोड़ों users इंटरनेट से जुड़ गये । यह कनेक्शनों की वृद्धि प्रतिवर्ष दोगुनी होती गई । इस प्रकार यह नेटवर्क से जुड़ने का सिलसिला लगातार दूसरे देशों तक फैलता गया । एक राष्ट्र के सभी कम्प्यूटरों का नेटवर्क पूर्व में ही बना हुआ हो और इस राष्ट्र के केन्द्रीय कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा जाये तो इंटरनेट पर नये कनेक्शन की संख्या सम्पूर्ण राष्ट्र में उपस्थित users के बराबर हो जायेगी , यही कारण है कि इंटरनेट का अत्यधिक तीव्रता प्रसार हुआ है । अतः यह एक निश्चित प्रोटोकॉल के Communication करने वाले विश्व भर के नेटवकों का समुच्चय ही इंटरनेट ( Internet ) कहलाता है ।

backbone in hindi:-

इंटरनेट के क्षेत्र और राष्ट्रीय nodes तथा नेटवकों को परस्पर जोड़ने वाली उच्चगति को communication लाइनों के समूह को बैकबोन ( backbone ) कहते हैं । AT & T , Sprint तथा भारत की VSNL और BSNL कम्पनियाँ इंटरनेट बैकबोन की लाइनों की स्थापना और संचालन करती हैं । ये कम्पनियाँ अन्य कम्पनियों और होस्ट्स को कनेक्शन देकर बैकबोन से जोड़ देती हैं । इंटरनेट बैकबोन से जुड़ने वाली ये कम्पनियाँ ही ISP ( इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर ) कहलाती हैं । ये ISP ही विभिन्न व्यावसायिक संस्थाओं और लोगों को टेलीफोन लाइन या केबल ( Cable ) के माध्यम से व्यक्तिगत कनेक्शन देती हैं । भारत में सत्यम , डाटा इन्फोसिस लिमिटेट , टाटा इंटीकॉम , VSNL और BSNL आदि , ISP हैं ।

Service on internet in hindi :-

वर्तमान में इंटरनेट पर विश्व भर का सम्पूर्ण सूचना , ज्ञान , और इतिहास उपलब्ध है । अधिकतर बैंक , शैक्षिक संस्थाओं और लगभग सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने user को अपनी सेवा देने के लिए इंटरनेट को माध्यम बना रखा है । इन संस्थानों ने अपनी प्रणाली से सम्बन्धित डाटा और सूचना के database इंटरनेट के माध्यम से उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे उपलब्ध करवा रखे हैं । ये डाटाबेस और सूचनाएं इंटरनेट के विभिन्न नोडों पर लगे कम्प्यूटरों में store रहते हैं और उनका नामकरण कर दिया जाता है , जिसे वेब साइट ( web site ) कहते हैं । 
इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं ( वेब साइट ) को देखने के लिए इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटर में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को execute किया जाता है । वेबसाइट को खोलने के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को वेब ब्राउज़र कहते हैं , जैसे Microsoft Internet Explorer और Netscape Navigator वेब ब्राउजर प्रोग्राम हैं ।

main internet services:-

1. E-mail in hindi:-

 इंटरनेट पर जब users एक कम्प्यूटर में से दूर स्थित दूसरे कम्प्यूटर में पत्र भेजता है तो इसे ई - मेल कहते हैं । यह सुविधा इंटरनेट पर सर्वाधिकuse की जाती है । इस सेवा का प्रारम्भ सन् 1970 से माना जाता है । 

2. न्यूज़ ग्रुप ( News Group ) :-

इंटरनेट पर public discourse के 34,000 से अधिक forums हैं जो विभिन्न प्रकार के विषयों पर समाचारों का आदान - प्रदान करते हैं , इन्हें न्यूज़ ग्रुप ( news group ) कहते हैं । ये न्यूजग्रुप लगभग सभी प्रकार के तकनीकी और गैर तकनीकी विषयों जैसे विज्ञान , खेल , राजनीति , कम्प्यूटर विज्ञान , अर्थशास्त्र आदि पर सामग्री उपलब्ध करवाते हैं । न्यूज़ग्रुपों के इस समूह को यूजनेट ( Usenet ) कहते हैं । यूज़नेट या न्यूज़ग्रुप का चलन सन् 1979 से हुआ था ।

3. फाइल ट्रांसफर ( File Transfer ) :-

एक कम्प्यूटर में उपस्थित फाइल को किसी दूसरे शहर में स्थित कम्प्यूटर में इंटरनेट के माध्यम से कॉपी कर सकते हैं , इसी क्रिया को फाइल ट्रांसफर कहते हैं । इसके लिए इंटरनेट पर एक प्रोटोकॉल क्रियाशील होता है जिसे फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल ( FTP ) कहते हैं ।

4. वर्ल्ड वाइड वेब ( www ) :-

इस अनुप्रयोग का आविष्कार अंग्रेज कम्प्यूटर विज्ञानी टिम बर्नर्स - ली ( Tim Bemers Lee ) ने किया था । किसी साइट पर टैक्स्ट , चित्र , ध्वनि , और वीडियो के साथ सूचना को वेब पेजों में वर्ल्ड वाइड वेब की सहायता से इंटरनेट पर प्रदर्शित करना सरल हो जाता है । इस सेवा की विशेषता यह है कि इसके द्वारा वेब साइटों में लिंक के जरिये अन्य वेब साइट पर एक माउस के क्लिक करने भर से जाया जा सकता है । वर्ल्ड वाइड वेब के आ जाने से इंटरनेट पर वेब पब्लिशिंग पर मल्टीमीडिया सहित सूचनाओं को web pages में प्रस्तुत करना आसान हो गया है । वेब पेज HTML , JavaScript , VRML , VBScript , और Java भाषाओं में लिखे जाते हैं ।

5. रिमोट लोगिन ( Remote login ):-

 Telnet जैसी सेवाओं के द्वारा हम इंटरनेट पर किसी भी स्थान से दूर किसी भी कम्प्यूटर में कार्य कर सकता है , ऐसी क्रिया रिमोट लोगिन कहलाती है । 

इंटरनेट के तत्त्व ( Elements of Internet in hindi):- 

 इंटरनेट पर विश्व भर के नेटवर्कों का नेटवर्क है और इस वाइड एरिया नेटवर्क ( WAN ) में अनेक नोड और लोकल एरिया नेटवर्क ( LAN ) होते हैं । 

1 . क्लाइन्ट कम्प्यूटर ( Client Computer ) :-

जब कोई कम्प्यूटर टेलीफोन लाइन या केबल के माध्यम से इंटरनेट से जुड़ता है तो इस अवस्था में यह कम्प्यूटर क्लाइन्ट कम्प्यूटर कहलाता है । क्लाइन्ट कम्प्यूटर इंटरनेट के सर्वर कम्प्यूटर से इंटरनेट पर उपलब्ध सेवाएँ प्राप्त करता है ।

2. सर्वर कम्प्यूटर ( Server Computer ) :-

ये इंटरनेट पर चौबीसों घंटे कार्यशील रहने वाले शक्तिशाली कम्प्यूटर होते हैं । क्लाइन्ट कम्प्यूटर टेलीफोन लाइन या केबल के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट होकर , सर्वर से डाटा और सूचनाएँ , वेब साइट या अन्य किसी साधन से प्राप्त करता है । सर्वर एक ही समय में अनेक क्लाइन्ट कम्प्यूटरों द्वारा मांगी गई सूचनाएँ और वेब साइटों को एक साथ प्रदान करने में सक्षम होता है ।

3. नोड ( Node ) :-

इंटरनेट पर स्थित किसी क्लाइन्ट , सर्वर या नेटवर्क को नोड ( node ) कहते हैं । Peer to Peer नेटवर्क में कोई सर्वर कम्प्यूटर नहीं होता है ।

Applications of internet in hindi:-

इंटरनेट के तीव्र से प्रचार - प्रसार ने विश्व में सूचना प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी शिखर पर पहुँचा दिया है । इसका कारण यह है कि हमारे दैनिक जीवन का कोई भी कार्य कम्प्यूटर और इंटरनेट से अछूता नहीं है , इसलिए कम्प्यूटर के applications को रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता है।

1. Mailing with E - mail :-

 बहुत ही कम खर्च में पत्र संदेश send के लिए ई - मेल का प्रयोग किया जाता है ।

2. Group Discussions :-

 इंटरनेट पर usenet के माध्यम से किसी विषय से सम्बन्धित लोग वाद - विवाद करते हैं और अपने ज्ञान में वृद्धि करके किसी conclusion तक पहुँचते हैं । इंटरनेट के यूजनेट पर अनेक विषय , जैसे , शिक्षा , विज्ञान , व्यापार , खेल - कूद , राजनीति , पत्रकारिता , चिकित्सा , योग व आयुर्वेद , सामाजिक रीति - रिवाज , आदि पर वाद - विवाद की सुविधा होती है । 

3. Commercial electronic store :-

इंटरनेट पर ऐसे sites भी आजकल उपलब्ध हैं जिन पर जाकर हम किसी वस्तु को खरीदने के लिए चुन सकते हैं और ऑर्डर दे सकते । 

4. Technical Guidance :-

 व्यापार में किसी उत्पाद से सम्बन्धित तकनीकी जानकारी की details इंटरनेट पर उपलब्ध सम्बन्धित वेब साइट पर जाकर प्राप्त किया जा सकता है । इसी प्रकार हमारे व्यापर से सम्बन्धित तकनीक और marketing details हम स्वयं भी इंटरनेट पर प्रकाशित कर सकते हैं , जिससे हमारे व्यापार का विज्ञापन और विकास कम खर्च में हो सके । 

5. Electronic publication :-

इंटरनेट पर सूचना पूर्ण रूप से इलेक्ट्रॉनिक है इसलिए इस पर material को आवश्यकता पड़ने पर परिवर्तित व नवीनीकृत किया जा सकता है , इसके लिए किसी संस्थान से अनुमति और प्रतीक्षा करने की भी आवश्यकता नहीं होती है ।

6. Examination Results :-

कुछ निजी वेबसाइट और संस्थानों की वेब साइट परीक्षा परिणाम इंटरनेट पर प्रकाशित करती हैं , जिससे परिणाम की घोषणा के तुरन्त बाद किसी भी शहर में अभ्यर्थी अपने रोलनम्बर के द्वारा इंटरनेट पर परीक्षा परिणाम और अंकतालिका की प्रति प्राप्त कर सकते हैं । www.indiaresult.com एक ऐसी ही वेब साइट है जिस पर अधिकतर विश्वविद्यालय , बोर्ड और भर्ती बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम उपलब्ध रहते हैं ।

7. Online Job :- 

आजकल विभिन्न निजी संस्थान डाटा एन्ट्री का कार्य इंटरनेट के माध्यम से लोगों से करवाते हैं और उसके remuneration का भुगतान करते हैं ।

8. Online Registration :-

कई विश्वविद्यालय , संस्थान और शिक्षण संस्थान इंटरनेट के माध्यम से प्रशिक्षण और पंजीकरण के लिए आवेदन ( form ) उपलब्ध करवाते हैं । इससे विद्यार्थियों का समय व धन व्यर्थ नष्ट नहीं होता है ।

9. Internet Banking :-

 लोग अपने बैंक के खातों का details इंटरनेट की सहायता से देख सकते हैं और इंटरनेट के ही माध्यम से घर बैठे ही लेन - देन का कार्य कर सकते हैं । इसके लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन बैंक की वेबसाइट खोलकरusers अपने खाते में पासवर्ड देकर login करता है और जिस व्यक्ति के खाते में भुगतान भेजना है , उसका चुनाव करके वेब साइट पर उपलब्ध विकल्पों की सहायता से Money Transfer कर सकता है।

10. E - Pay :-

users इंटरनेट के माध्यम से सभी प्रकार के बिलों ( जैसे- टेलीफोन , बिजली , पानी आदि ) का भुगतान कर सकता है । इसकी सुविधा कई ऑनलाइन बैंक प्रदान करती हैं , उदाहणार्थ - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रुप की वेब साइट www.onlinesbi.com पर ई - पे की सुविधा उपलब्ध है।

11. E - Rail :-

इंटरनेट के माध्यम से रेल आरक्षण टिकट की बुकिंग ऑनलाइन करना संभव है । इसकी भी सुविधा कई ऑनलाइन बैंक प्रदान करती हैं , उदाहणार्थ - स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ग्रुप की वेब साइट www.onlinesbi.com पर भारतीय रेल की किसी भी ट्रेन में रेल आरक्षण टिकट बुक कर सकते हैं और टिकट और आरक्षण का भुगतान user की बैंक में जमा राशि में से स्वतः ही हो जाता है ।

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