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विमर्श (नैरेटिव) का मायाजाल एवं सही विमर्श - Narrative ka Mayajaal

विमर्श (नैरेटिव) का मायाजाल एवं सही विमर्श (Narrative ka Mayajaal)- नैरेटिव का मायाजाल एवं सही विमर्श-1:- • हम क्या हैं, हम कौन थे और क्या कर सकते हैं?  • ऐसे प्रश्नों के उत्तरों की चाबी किसके पास है? • अपनी और दूसरों की दृष्टि में हमारी पहचान क्या है?  • जब किसी विषय विशेष पर हमारे मन में ऐसे कुछ प्रश्न उठते हैं या फिर हमसे उस विषय विशेष पर कोई कुछ पूछता है, तो उन उत्तरों का आधार क्या होता है? इन सभी प्रश्नों के उत्तर को यदि किसी एक शब्द में व्यक्त करना हो, तो उसे "विमर्श या नैरेटिव (Narrative)" कहा जा सकता है। हम वही बोलते हैं और समझते हैं, जो हमें बार-बार दिखाया, सुनाया और सिखाया जाता है। वो ही हमारी विश्लेषण करने की शक्ति, हमारे चिंतन की सीमा, हमारी जानकारी की परिधि और ज्ञान की गहराई को निर्धारित करता है। हमारा चिंतन और मानस (Thinking & Mindset) उस नैरेटिव से बनता है, जो हमारे समक्ष परोसा गया है। "अब वह नैरेटिव सत्य पर आधारित है, अर्धसत्य से प्रेरित है या बिल्कुल झूठा, मिथक है और फर्जी है- यह सब उस नैरेटिव को परोसने वाले और उसकी नीयत (Mentality) पर निर्भर करता...