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मार्च, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

sql notes in hindi pdf

SQL notes in hindi pdf:- what is sql in hindi (sql क्या है?):- Introduction of sql in hindi:- इस  Oracle  Database के अन्दर डाटा एक्सेस करने के लिए सभी programs और user को  स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंग्वेज SQL  का प्रयोग करना होता है । SQL कमांड्स का ऐसा set है , जिसे लगभग सभी  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  द्वारा Recognize किया जाता है। इस SQL का पहला Commercial रूप से उपलबध पहला Implementation 1979 में रिलेशनल सॉफ्टवेयर Incorporation ने जारी किया था और जिसे आज ऑरेल कॉर्पोरेशन के रूप में जाना जाता है । इस तरह  Oracle  ही शुरूआती  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  है , जिसने SQL का उपयोग शुरू किया । इस SQL का उपयोग ज्यादातर  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  के लिए एक standard बन गया है । हालांकि Application program और ऑरेकल टूल users को सीधे SQL का उपयोग किए बिना डाटाबेस एक्सेस करने की अनुमति देते हैं और इन application को users की Request execute करते समय SQL का उपयोग करना होता है । यह स्ट्रक्चर्ड क्वेरी...

शिक्षक का व्यवहार कैसा होना चाहिए? (What should be the behaviour of a teacher?)

 शिक्षक का व्यवहार कैसा होना चाहिए:-  शिष्य एवं शिक्षक के बीच शिष्टाचार-1:- एक विद्यार्थी अपने शिक्षक से ज्ञान प्राप्त कर जीवन में अग्रसर होता है, अपने जीवन का निर्माण करता है। जो विद्यार्थी अच्छे गुणों को ग्रहण कर शिष्टाचारी बनकर जीवन- पथ पर आगे बढ़ता है; जीवन में उच्च पद, सम्मान आदि प्राप्त करता है और उसको समाज में एक आदर्श व्यक्तित्व का दर्जा प्राप्त होता है। दूसरी ओर वह शिष्य है, जो अशिष्ट है। वह इस दुनियां में आता है और चला जाता है। उसका जीवन कीड़े-मकोड़े की तरह होता है- अर्थात् उनका कोई अस्तित्व नहीं होता। वह निरुद्देश्य जीवन जीते मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। जहाँ एक ओर विद्यार्थियों को अपने गुरुजनों, शिक्षकों के साथ सम्मानजनक उचित व्यवहार करना चाहिए, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को भी अपने शिष्यों, विद्यार्थियों के सम्मान का उचित ध्यान रखना चाहिए, अर्थात् दोनों का एक-दूसरे के प्रति शिष्टाचार आवश्यक है।  शिष्य एवं शिक्षक के बीच शिष्टाचार-2:- विद्यार्थी को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए, न कि अपने माता-पिता अथवा अभिभावक पर निर्भर होना चाहिए। जो विद्यार्थी अपना कार्य स्वयं कर...

नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार (Civic duties and etiquette)

 नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार :-  घर में शिष्टाचार-1:- घर वह स्थान है, जहाँ से बच्चा प्रथम शिष्टाचार सीखता है; क्योंकि माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, तत्पश्चात् बच्चा स्कूल आदि से शिष्टाचार प्राप्त करता है। घर में जैसा माता पिता, चाचा चाची या अन्य बड़ों का आपसी संवाद और व्यवहार होता है, बाल मन पर उसका निश्चित प्रभाव पड़ता है। बालक जैसा देखता है, वैसा ही सीखता है। इसलिए परिवार में आग्रहपूर्वक सभी बड़े संयमित व मर्यादित संवाद व व्यवहार करें। घर से ही शिष्टाचार की नींव सुदृढ़ होती है, क्योंकि घर का माहौल, रहन-सहन, बातचीत का ढंग, मेल-मिलाप आदि शिष्टाचार का वह प्रथम अध्याय है, जो किसी को भी सामाजिक प्राणी बनाता है।  घर में शिष्टाचार-2:- घर में कोई सदस्य- चाहे छोटा हो अथवा बड़ा-सभी को एक-दूसरे के प्रति उचित शिष्टाचार अपनाना पड़ता है, तभी घर एक खुशहाल परिवार अथवा ' स्वीट होम ' कहलाता है। जिस घर में लोगों में एक-दूसरे के प्रति शिष्टाचार की भावना नहीं है अथवा वे एक-दूसरे के प्रति उचित शिष्टाचार नहीं अपनाते हैं वह घर घर नहीं, अपितु पशुओं के रहने के स्थान समान होता है, जहाँ प...

महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा

महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा-1:- कुंभ मेला दुनियां में आस्था और आध्यात्मिकता की सबसे असाधारण अभिव्यक्तियों में से एक है, जो भारतीय संस्कृति और धर्म के शाश्वत सार को दर्शाता है। यह हिंदू परंपराओं में गहराई से निहित एक पवित्र तीर्थयात्रा है, जहाँ लाखों भक्त, साधु- सन्त (पवित्र पुरुष), विद्वान् और साधक ईश्वर में अपनी सामूहिक आस्था का उत्सव मनाने के लिए एकत्र होते हैं। जहां राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता के सहज दर्शन होते हैं।* यह स्मारकीय आयोजन महज धार्मिक उत्सव की सीमाओं से परे जाकर भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक जागृति के जीवंत संगम के रूप में विकसित होता है। महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा-2:- चार पवित्र स्थानों- हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन - पर चक्रीय रूप से आयोजित होने वाला कुंभ मेला सत्य और मोक्ष की शाश्वत खोज का प्रतीक है। इन स्थानों को मनमाने ढंग से नहीं चुना जाता है; वे प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों और आकाशीय संरेखण से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं, जो इन पर्वों को गहन आध्यात्मिक महत्त्व देते हैं। प्रत्येक स्थल नदियों या तीर...