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relational model in hindi - DBMS in hindi

 आज हम  computers  in hindi  मे   relational model in hindi-   DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- relational model in hindi (रिलेशनल मॉडल क्या है?):- इसमे रिलेशनल डेटा मॉडल सबसे पहले E.E.Codd द्वारा 1970 में तथा बाद में IBM के San Jose Reserch Laboratosy जो कि R सिस्टम के development के लिए Responsible है इसके द्वारा 1970 के दौरान ही Presented किया गया और दूसरी बार कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बार्कले जो इन्ग्रेस अकादमिक ओरिएन्टेड RDMS के development के लिए Responsible है इसके द्वारा Presented किया गया । 1980 के आसपास कई producers द्वारा Professional  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)   producers को प्रारंभ किया गया और आजकल RDBMS's डेटाबेस मैनेजमेंट के लिए उच्च स्तर की Technique रखते है और अब Personal computers (  personal computer kya hai )और mainframe की limits में कई सारे  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS )  इसमे आते हैं । इसमे रिलेशनल डेटा मॉडल में डेटा को tables के रूप में Displayed करते हैं । रिलेशनल मॉडल Mathema
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degree of relationship in dbms in hindi - DBMS in hindi

 आज हम  computers  in hindi  मे   degree of relationship in dbms in hindi -   DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- degree of relationship in dbms in hindi ( डिग्री ऑफ रिलेशनशिप):- इसमे किसी relationship में भाग लेने वाली total entitys की संख्या डिग्री ऑफ रिलेशनशिप (degree of relationship in dbms )  कहलाती है और degree of relationship in dbms को हम कई प्रकार से इसे Classified कर सकते है ( 1 )  unary relationship in dbms ( 2 )  unary relationship in dbms ( 3 )  unary relationship in dbms 1. यूनेरी रिलेशनशिप ( Unary Relationship in DBMS in hindi ) :- इसमे किसी एक ही  entity  type के  Instances  के मध्य की relationship को unary relationship in dbms कहते हैं । 2. बायनरी रिलेशनशिप ( Binary Relationship in DBMS in hindi):- इसमे किन्हीं दो प्रकार के entity types के Instances के मध्य की relationship की बायनरी रिलेशनशिप ( Binary Relationship in DBMS in hindi )  कहते हैं और यह डेटा मॉडलिंग में सबसे अधिक उपयोग में आने वाली relationship होती है । 3. ट

relationship in dbms in hindi - DBMS in hindi

आज हम  computers  in hindi  मे   relationship in dbms in hindi-   DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- Relationship in dbms in hindi:- इसमे relationship कई Entities के बीच एक Association होता है और relationship set relationship  का वह set होता है जिसमें एक प्रकार के relationship होते हैं । मेपिंग को - ऑर्डिनलिटिज ( Mapping Cardinalities in hindi ) :- इसमे यह Entities की संख्याओं को  Content  करता है और जिससे relationship set से अन्य Entities को जोड़ा जा सकता है ।  types of mapping cardinalities in dbms:- (1) वन टु वन (one to one relationship in dbms) (2)  वन टु मेनी  (one to many relationship in dbms) (3)  मेनी टु वन  (many to one relationship in dbms) (4) मेनी टु मेनी  (one to many relationship in dbms) इसमे अब हम relationship का पता लगाना चाहते हैं और हम दो टेबल बनाते हैं और उन टेबलों के base पर  relationship  बनाते हैं , हमारे पास दो टेबल हैं । पहला CUSTOMER टेबल और दूसरा LOAN टेबल और आईये इन दो टेबलों में  Mapping Co - Ordination  को देख

Entity types in DBMS – in hindi : डीबीएमएस

 आज हम  computers  in hindi  मे   Entity types in DBMS – in hindi-   DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- Entity types in DBMS in hindi:- इसमे key एट्रिब्यूट के आधार पर entity sets को दो भागों में  divided  किया जा सकता है।  1. स्ट्रांग ( मजबूत ) एन्टिटी सेट ( Strong Entity Set ):- यह एक ऐसा entity sets जिसमें एक ऐसी  Attribute  हो , जिसको की प्रायमरी - ' key ' बनाया जा सके और इस Entity set को strong entity set कहते हैं । Example:- Primary key       RN      NAME      ADD    CITY                               101     AJAY      TONK    DELHI                                 102     PANKAJ JODHPUR DELHI RN fields को प्रायमरी - ' key ' के रूप में भी लिया जा सकता है और क्योंकि यह प्रत्येक रो के लिये एक  Unique value  को दर्शाती है । 2. वीक या कमजोर एन्टिटी सेट ( Weak Entity Set ) :- इसमे एक ऐसा entity sets जिसमें एक भी ऐसी fields न हो जिसको की प्रायमरी- ' key ' बनाया जा सके और इस entity sets को  Weak Entity Set   कहते हैं । Exa

ansi sparc architecture of dbms - DBMS in hindi

आज हम  computers  in hindi  मे  ansi sparc architecture of dbms -  DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- ansi sparc architecture of dbms:- ansi sparc architecture (American National Standard Institute / Standard Planning and Requirements Committee)  के डीबीएमएस के तीन लेबल के आर्किटेक्चर का उपयोग Physical database व user के एप्लीकेशन को अलग - अलग करने के लिये किया जाता है । प्रत्येक लेबल के view को दर्शाने के लिये एक स्कीम का उपयोग करते हैं और स्कीम एक प्लान होता है जो रेकार्ड व view की समस्त रिलेशनशील को परिभाषित करता है । इस आर्किटेक्चर के निम्नलिखित तीन व्यू होते हैं :  ( 1 ) एक्सटरनल लेबल  (External Label ) ( 2 ) कान्सेप्च्युअल लेबल (  Conceptual Label) ( 3 ) इनटरनल  लेबल (  Internal Label) ( 1 ) एक्सटरनल लेबल  (External Label ):- यह डेटाबेस का सबसे ज्यादा Abstract label होता है जहाँ पर कि डेटाबेस का वह भाग ही दिखाता है जो कि किसी यूजर को या एप्लिकेशन प्रोग्राम को चाहिये होता है । किसी भी एक ग्लोबल ( Compual ) लेबल के बहुत से यूजर व्यूज हो सक

data abstraction in hindi - DBMS in hindi

 आज हम  computers  in hindi  मे data abstraction in hindi -  DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- data abstraction in dbms in hindi (डेटा ऐबस्ट्रेक्शन):- यह एक डेटाबेस सिस्टम में स्वयं डेटाबेस के अलावा डेटाबेस स्ट्रक्चर की सारी definition व Constants भी शामिल होते हैं और डेटाबेस की परिभाषा मतलब प्रत्येक फाइल का स्ट्रक्चर , प्रत्येक data items का टाईप व संग्रह format तथा साथ ही डेटा पर लगने वाले Constants जिस फाईल में संग्रह करके रखी जाती है , उसे सिस्टम केटेलॉग ' कहते हैं और इस केटेलॉग की समस्त सूचना को मेटा डेटा कहते है । 1. data independence in hindi 2. operation independence 3. data abstraction in dbms in hindi 1. data independence in dbms in hindi:- यह सामान्यत : किसी भी फाइल प्रोसेसिंग सिस्टम में डेटा फाइल का स्ट्रक्चर व उसको एक्सेस करने वाला प्रोग्राम एक format के रूप में होते हैं और फाइल के स्ट्रक्चर में किसी भी प्रकार का change के लिये एक्सेस प्रोग्राम में भी परिवर्तन आवश्यक होता है । डीबीएमएस में डेटा फाइल का स्ट्रक्चर केटेलॉग मे

structure of dbms in hindi - DBMS in hindi

आज हम  computers  in hindi  मे  structure of dbms in hindi -  DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- structure of dbms in hindi:- User की सुविधा के लिये DBMS को 4 types मे  divided  कर सकते है - ( 1 ) डेटा डेफिनेशन लेंग्वेज कम्पाईलर :- यह DDL कम्पाईलर DDL Statements की टेबल्स के समूह में परिवर्तित करता है और इन टेबलों में मेटा डेटा होता है जोकि डेटाबेस से संबंधित होता है व ऐसे रूप में होता है जिसको डीबीएमएस के दूसरे अवयव भी उपयोग कर सकें ।  ( 2 ) डेटा मैनेजर :- यह डीबीएमएस का केंद्रीय साफ्टवेयर अवयव होता है । यह फाइल सिस्टम से  संचार का कार्य करता है और यह डेटा की स्थायित्व व सुरक्षा को बनाये रखता है । डेटा मैनेजर यूजर की क्यूरी के आपरेशन्स् को यूजर के लॉजिकल व्यू से फिजिकल फाइल सिस्टम में परिवर्तित करने का कार्य करता है और चाहे क्यूरी प्रोसेसर को यह क्यूरी सीधे दी गई हो अथवा किसी एप्लीकेशन प्रोग्राम के द्वारा Indirect रूप से दी गई हो । यह बेकअप व रिकवरी आपरेशन्स् में भी यह भाग लेता है ।  ( 3 ) फाइल मैनेजर :- यह फाइल मैनेजर फाइल स्पेस व फाइ

limitations of dbms in hindi - DBMS in hindi

 आज हम  computers  in hindi मे limitations of dbms - DBMS in hindi   के बारे में जानकारी देगे क्या होती है तो चलिए शुरु करते हैं- limitations of dbms (DBMS की सीमाएँ ) :- DBMS( डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम)   उपयोग करने के फायदों के बावजूद ऐसी स्थितियाँ भी हैं , जिसमें ऐसे सिस्टम में अनावश्यक लागत आती है और यह लागत traditional फाईल प्रोसेसिंग में वहन नहीं करना पड़ती है और DBMS(   डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम) उपयोग करने के अतिरिक्त लागत इन कारणों से आती हैं। 1. हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर और ट्रेनिंग में उच्च प्रारंभिक निवेश का होना ।  2.Data refining और प्रोसेसिंग के लिये DBMS ( डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम)  द्वारा उपलब्ध कराई गई साधारणता के कारण ।  3. सिक्योरिटी व कांकरेंसी कंट्रोल व रिकवरी और इंटिग्रिटी फंक्शन उपलब्ध कराने का ओवरहेड अथवा अतिरिक्त खर्च ।  डाटाबेस डेवलपमेंट प्रोसेस ( Database Development process in hindi ) :- डाटाबेस डेवलपमेंट के classic style में एक ऐसी Systematic process के रूप में लिया जाता है और हम निम्न चरणों में विभाजित करते हैं । इसमे किसी संस्थान की आवश्यकताओं की व्याख्या क

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कंप्यूटर की पीढियां । generation of computer in hindi language

generation of computer in hindi  :- generation of computer in hindi language ( कम्प्युटर की पीढियाँ):- कम्प्यूटर तकनीकी विकास के द्वारा जो कम्प्यूटर के कार्यशैली तथा क्षमताओं में विकास हुआ इसके फलस्वरूप कम्प्यूटर विभिन्न पीढीयों तथा विभिन्न प्रकार की कम्प्यूटर की क्षमताओं के निर्माण का आविष्कार हुआ । कार्य क्षमता के इस विकास को सन् 1964 में कम्प्यूटर जनरेशन (computer generation) कहा जाने लगा । इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर के विकास को सन् 1946 से अब तक पाँच पीढ़ियों में वर्गीकृत किया जा सकता है । प्रत्येक नई पीढ़ी की शुरुआत कम्प्यूटर में प्रयुक्त नये प्रोसेसर , परिपथ और अन्य पुर्षों के आधार पर निर्धारित की जा सकती है । ● First Generation of computer in hindi  (कम्प्युटर की प्रथम पीढ़ी) : Vacuum Tubes ( वैक्यूम ट्यूब्स) ( 1946 - 1958 ):- प्रथम इलेक्ट्रॉनिक ' कम्प्यूटर 1946 में अस्तित्व में आया था तथा उसका नाम इलैक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इन्टीग्रेटर एन्ड कैलकुलेटर ( ENIAC ) था । इसका आविष्कार जे . पी . ईकर्ट ( J . P . Eckert ) तथा जे . डब्ल्यू . मोश्ले ( J . W .

पर्सनल कंप्यूटर | personal computer

पर्सनल कंप्यूटर क्या है? ( Personal Computer kya hai ?) :- personal computer definition :- ये Personal computer  क्या है शायद हम सभी लोगों यह  पता होगा क्यूंकि इसे हम अपने घरों में, offices में, दुकानों में देखते हैं  Personal computer (PC) किसी भी उपयोगकर्ता के उपयोग के लिए बनाये गए किसी भी छोटे और सस्ते कंप्यूटर का निर्माण किया गया । सभी कम्प्युटर Microprocessors के विकास पर आधारित हैं। Personal computer  का उदाहरण माइक्रो कंप्यूटर,  डेस्कटॉप कंप्यूटर, लैपटॉप कंप्यूटर, टैबलेट हैं। पर्सनल कंप्यूटर के प्रकार ( personal computer types ):- ● डेस्कटॉप कंप्यूटर (Desktop) ● नोटबुक (Notebook) ● टेबलेट (tablet) ● स्मार्टफोन (Smartphone) कम्प्युटर का इतिहास ( personal computer history) :- कम्प्यूटर के विकास   (personal computer evolution)  के आरम्भ में जो भी कम्प्यूटर विकसित किया जाता था , उसकी अपनी एक अलग ही संरचना होती थी । तथा अपना एक अलग ही नाम होता था । जैसे - UNIVAC , ENIAC , MARK - 1 आदि । सन् 1970 में जब INTEL CORP ने दुनिया का पहला माइक्रोप्रोसेसर (

कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है और कीबोर्ड के प्रकार

कम्प्युटर कीबोर्ड क्या है ( keyboard in hindi ) की - बोर्ड लगभग टाइपराइटर के सामान ही होता है , फर्क सिर्फ इतना है कि टाइपराइटर में लगे बटनों की अपेक्षा की - बोर्ड के बटन आसानी से दबते हैं जिससे लम्बे समय तक कार्य करने में सुविधा रहती है । की - बोर्ड के बटनों में एक खास बात यह भी होती है कि किसी बटन को कुछ देर तक दबाए रखा जाये तो  वह स्वयं को repeats होता है ।  की - बोर्ड एक केबल के द्वारा कम्प्यूटर से जुड़ा होता है जिसका एक सिरा की - बोर्ड तथा दूसरा सिरा CPU के पीछे लगे एक सॉकेट में लगाया जाता है । टाइपराइटर की तुलना में की - बोर्ड में कई अधिक Keys होती हैं , जिनसे अनेक प्रकार के काम किये जाते है। की -  बोर्ड के सबसे ऊपर right side ओर तीन रोशनी देने वाली light लगी होती हैं । ये Caps Lock , Num Lock तथा Scroll Lock key की स्थिति दर्शाते रहते हैं । की - बोर्ड ( कुंजीपटल ) user के निर्देशों / आदेशों अथवा डाटा / सूचना को कम्प्यूटर में input कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है तथा सर्वाधिक प्रचलित है इसके द्वारा सूचना / डाटा सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को भेजा जाता है । Caps Lock / Num