सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दिसंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ahilya Bai Holkar story part-12

पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर:- पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर- देवी के प्रशासन के कुछ विशेष तथ्य:- 1. देवी अहल्याबाई की न्याय व्यवस्था धनप्राप्ति के लिये नहीं थी। 2. धारणाशक्ति एवं समझदारी अद्वितीय होने के कारण किसी भी बात का मर्म सहजता से ग्रहण करके सही व त्वरित निर्णय देने की उनकी क्षमता थी। उनके आदेश मार्मिक होते थे। 3. दिल्ली बादशाह का एक पत्र लेकर एक सेवक आया। उसने कहा कि पत्र बादशाह का है और स्वागत के लिये दो कदम आगे बढ़कर पत्र लेना चाहिये। तब देवी अहल्याबाई ने निर्भयता से कहा कि "श्रीमंत पेशवा ने बादशाह को जागीर दी है इस कारण उसके पत्र का इतना सम्मान करने की कोई आवश्यकता नहीं है।" कितना साहस एवं स्वाभिमान था अहल्याबाई में! 4. धर्मपरायणता व परधर्म सहिष्णुता जहाँ होती है वहाँ कूटनीति निपुणता नहीं होती। जहाँ कूटनीति कुशलता व कल्पकता होती है वहाँ धार्मिक वृत्ति, कर्तव्यभावना नहीं दिखाई देती है। धैर्य व पराक्रम के साथ विनम्रता नहीं होती। शक्ति व वैभव जहाँ है वहाँ चारित्र्य एवं सात्विकता का दर्शन नहीं होता है। परन्तु ये सभी व्यावहारिक सत्य देवी अहल्याबाई में स...

Ahilya Bai Holkar story part-11

पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर:- पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर- निर्माण हो या दान-पुण्य 'खासगी' (निजि) धन से-1:- व्यसन में डूबे और गलत राह पर जाते हुए अपने पति से अहिल्यादेवी निराश नहीं हुई, बल्कि उन्होंने अपने पति को सही राह पर लाने ले जाने का प्रयास किया। वे बहुत हद तक इसमें वह सफल भी हुई। जब देवी अहिल्या ने अपने पति को भी उनके अनर्गल खर्च के लिए, राजकोष से धन देने के लिए मना कर दिया, तो गुस्से में पति खंडेराव जी ने राजकीय बहीखातों को फेंक दिया था। यह देखकर अहिल्या देवी ने अपने पति पर ही जुर्माना लगा दिया। हालांकि बाद में पत्नीधर्म निभाते हुए उन्होंने उनसे क्षमा भी मांगी और अपने खासगी (निजी) धन से ही 25 मुद्राओं का जुर्माना भरा था। देवी अहिल्याबाई की सास गौतमाबाई को उनके भाई से जागीर प्राप्त हुई थी। बाजीराव पेशवा ने भी गौतमाबाई को एक बड़ी राशि दिनांक 20 जनवरी 1734 को दी थी। उन दिनों धनगर समाज में पति की कमाई का एक चौथाई हिस्सा पत्नी को दिया जाता था। अतः यह राशि भी गौतमाबाई को मिली। इस संपूर्ण राशि को मिला करके एक खासगीकोष अर्थात विशेष कोष बना। अहिल्याबाई इसी खा...

Java notes pdf in hindi

 -:Java notes in hindi pdf:- JAVA के हिन्दी नोट्स - java programming notes pdf free download in hindi:-  आज हम आपको JAVA की PDF  देने जा रहे है। जिसे आप आसानी से डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं।

Ahilya Bai Holkar story part-10

  पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर:- पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर- तीर्थस्थलों का विकास - उनकी राष्ट्रीय दृष्टि-1:- केवल महेश्वर क्षेत्र में ही उन्होंने 28 घाट और 50 मंदिर बनवाए थे।  अहिल्या माता की दृष्टि केवल मालवा राज्य तक ही सीमित नहीं थी, वस्तुतः वह पूरे राष्ट्र को सनातन संस्कृति में गूंथा हुआ ही देखती थीं। उनका दृष्टिकोण अखिल भारतीय था। वे मानती थीं कि भारत की एकात्मता में तीर्थ यात्राओं का बड़ा महत्व है। ये तीर्थ यात्राऐं न केवल आध्यात्मिक सुख शांति देती हैं अपितु विविध क्षेत्र, पंथ, भाषा, मान्यताओं वाले इस विराट भारत के जन-जन को एकात्मता के सूत्र में बांधती हैं। उन्हें यह भलीभाँति एहसास था कि युगों युगों से चली आ रही तीर्थ यात्राओं की यह पावन परंपरा विदेशी विधर्मी सत्ताओं के कारण टूट गयीं हैं। इन स्थानों के मार्ग, मंदिर, अन्नक्षेत्र, पेयजल व्यवस्था, धर्मशालाएँ इस्लामिक आक्रांताओं ने ध्वस्त कर दी हैं। इनके पुनर्निर्माण किये बिना तीर्थ यात्राएँ सुगम नहीं होंगी। इसीलिए पूरे भारत में उन्होंने एक दृष्टी से अनेकों महत्वपूर्ण निर्माण कार्य करवाए।     ...

Ahilya Bai Holkar story part-9

पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर:- पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर- सैन्य प्रबंधन-1:- जब अहिल्या देवी ने शासन संभाला, तब उनकी पूरी सेना के पास मात्र तीन बंदूके हुआ करती थी। किन्तु जब उन्होंने अपनी सेना की क्षमता बढ़ाना प्रारंभ की, तो अंग्रेजों ने जानबूझकर बंदूकों का मूल्य बढ़ा दिया और देवी अहिल्या को बंदूके देना बंद कर दिया। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अहिल्या माता ने स्वयं अपने शास्त्रागरों का निर्माण प्रारंभ कर दिया था। अपने जीवन काल में उन्होंने सात किलों का निर्माण किया, तोपखानों की स्थापना करना वे बड़े अच्छे से जानती थी। अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए उन्होंने बोइड (Boyd) नाम के एक ऑफिसर को भी नौकरी पर रखा था। मल्हारराव जी होलकर और देवी गौतमाबाई द्वारा प्रदत्त प्रशिक्षण में, अहिल्या माता ने बहुत कुछ सीखा था। समय के साथ-साथ वे पूरा का पूरा तोपखाना कैसे स्थापित किया जाता है, यह भी सीख गईं। भानपुरा में उन्होंने तोपखाना स्थापित भी किया और गोहद के युद्ध के लिए वहां से तोप लेकर स्वयं गई थीं। इन्ही तोपों के माध्यम से अहिल्या माता ने गोहद के युद्ध में विजय प्राप्त की थी। पुण्यश्लोका...

Ahilyabai Holkar History in Hindi ( अहिल्याबाई होल्कर )

 Ahilyabai Holkar History in Hindi ( अहिल्याबाई होल्कर ):- 31 मई, 2024 से अहल्यादेवी होलकर का ' 300 वाँ ' जयंती वर्ष प्रारंभ हो गया है। उनका जीवन भारतीय इतिहास का एक गौरवशाली स्वर्णिम पर्व है। ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले सामान्य परिवार की बालिका से एक असाधारण शासनकर्ता तक की उनकी जीवनयात्रा आज भी प्रेरणा का महान स्रोत है। वे कर्तृत्व परायण, सादगी, धर्म के प्रति समर्पण, प्रशासनिक कुशलता, दूरदृष्टि एवं उज्वल राष्ट्रीय चारित्र्य का अद्वितीय आदर्श थीं।  'श्री शंकर आज्ञेवरून' (श्री शंकर जी की आज्ञानुसार) इस राजमुद्रा से चलने वाला उनका शासन हमेशा भगवान् शंकर के प्रतिनिधि के रूप में ही काम करता रहा....।  उनका लोक कल्याणकारी शासन भूमिहीन किसानों, भीलों जैसे जनजाति समूहों तथा विधवाओं के हितों की रक्षा करनेवाला एक आदर्श शासन था।   समाजसुधार, कृषिसुधार, जल प्रबंधन, पर्यावरण रक्षा, जनकल्याण और शिक्षा के प्रति समर्पित होने के साथ साथ उनका शासन न्यायप्रिय भी था।   समाज के सभी वर्गों का सम्मान, सुरक्षा, प्रगति के अवसर देने वाली समरसता की दृष्टि उनके प्रशासन का आधार रही।...