पुण्यश्लोका लोकमाता अहल्यादेवी होलकर:- पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर- देवी के प्रशासन के कुछ विशेष तथ्य:- 1. देवी अहल्याबाई की न्याय व्यवस्था धनप्राप्ति के लिये नहीं थी। 2. धारणाशक्ति एवं समझदारी अद्वितीय होने के कारण किसी भी बात का मर्म सहजता से ग्रहण करके सही व त्वरित निर्णय देने की उनकी क्षमता थी। उनके आदेश मार्मिक होते थे। 3. दिल्ली बादशाह का एक पत्र लेकर एक सेवक आया। उसने कहा कि पत्र बादशाह का है और स्वागत के लिये दो कदम आगे बढ़कर पत्र लेना चाहिये। तब देवी अहल्याबाई ने निर्भयता से कहा कि "श्रीमंत पेशवा ने बादशाह को जागीर दी है इस कारण उसके पत्र का इतना सम्मान करने की कोई आवश्यकता नहीं है।" कितना साहस एवं स्वाभिमान था अहल्याबाई में! 4. धर्मपरायणता व परधर्म सहिष्णुता जहाँ होती है वहाँ कूटनीति निपुणता नहीं होती। जहाँ कूटनीति कुशलता व कल्पकता होती है वहाँ धार्मिक वृत्ति, कर्तव्यभावना नहीं दिखाई देती है। धैर्य व पराक्रम के साथ विनम्रता नहीं होती। शक्ति व वैभव जहाँ है वहाँ चारित्र्य एवं सात्विकता का दर्शन नहीं होता है। परन्तु ये सभी व्यावहारिक सत्य देवी अहल्याबाई में स...