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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS?)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS? )

 यह कार्यप्रणाली (Methodology) है,और कुछ नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का जो संगठन है, वह करता क्या है? वह व्यक्ति-निर्माण का काम करता है। क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार का परिवर्तन आज भी हम चाहते हैं। हमको भेद मुक्त समाज चाहिए, समतायुक्त समाज चाहिए, शोषण-मुक्त समाज चाहिए। समाज से स्वार्थ भी जाना चाहिए।

 लेकिन यह जाना चाहिए,केवल ऐसा कहने से नहीं होगा। समाज का आचरण उदाहरणों की उपस्थिति में बदलता है।

हमारे यहाँ आदर्श हैं,महापुरुषों की कोई कमी नहीं है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करनेवाले इस भूमि में आदिकाल से इस क्षण तक बहुत लोग हैं। लेकिन अपने सामान्य समाज की प्रवृत्ति क्या है? वह उनकी जयंती, पुण्यतिथि मनाता है। उनकी पूजा जरूर करेगा, उनके जैसा गलती से भी नहीं बनेगा।छत्रपति शिवाजी महाराज फिर से होने चाहिए, लेकिन मेरे घर में नहीं होने चाहिए, दूसरे के घर में होना चाहिए।

कुछ वर्ष पहले रीडर्स डाइजेस्ट में एक अंग्रेजी वाक्य पढ़ा था, उसमें यह कहा था कि The ideals are like stars, which we never reach. आदर्श दूर ही रहते हैं। उनकी पूजा होती है, उनका अनुकरण नहीं होता है। आगे का वाक्य है, But we can plot our chart according to them. उसमें ploting the chart का काम नहीं होता। वह किसके भरोसे होता है? अपने निकट जो लोग हैं, उनके आचरण का प्रभाव हमारे आचरण पर होता है। अगर देश के प्रत्येक गाँव में, प्रत्येक गली-मोहल्ले में स्वतंत्र भारत के आज के नागरिक का जैसा आचरण होना चाहिए, वैसा आचरण करनेवाले हर परिस्थिति में उसको न छोड़नेवाले, उस पर अड़े रहनेवाले, चारित्र्यसंपन्न, संपूर्ण समाज से अपना आत्मीय संपर्क रखनेवाले लोग खड़े हो जाएँगे, तो उस वातावरण में समाज का आचरण बदलेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ:-

संघ की योजना प्रत्येक गाँव में, प्रत्येक गली में अच्छे स्वयंसेवक खड़े करना है। अच्छे स्वयंसेवक का मतलब है, जिसका अपना चरित्र विश्वासयोग्य है, शुद्ध है। जो संपूर्ण समाज को, देश को अपना मानकर काम करता है। किसी को भेदभाव से, शत्रुता के भाव से नहीं देखता और इसके कारण, जिसने समाज का स्नेह और विश्वास अर्जित किया है। ऐसा आचरण करनेवाले लोगों की टोली प्रत्येक गाँव में, प्रत्येक मोहल्ले में खड़ी हो। यह योजना 1925 में संघ के रूप में प्रारंभ हुई। संघ बस इतना ही है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।

डॉ. हेडगेवार को पूछा गया कि आप क्या करेंगे? 1928 में जब पहली बार संघ का पथ संचलन नागपुर में हुआ, उसमें ज्यादा लोग नहीं थे। 21-22 ऐसी संख्या थी। लेकिन अपने समाज में उस समय 21-22 लोग भी एक दिशा में कदम मिलाकर चल रहे हों, यह दृश्य बड़ा दुर्लभ था। इसलिए लोग प्रभावित हो गए और डॉ. हेडगेवार के पास गए, क्योंकि उनको पता था कि ये क्रांतिकारक मनोवृत्ति के आदमी हैं। इन्होंने अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया है। 

तो उनको लगा कि इनकी जरूर कोई दूर की रूपरेखा (Design) है, दूर की गोटी कुछ खेल रहे हैं। तो बड़े विश्वास में लेकर पूछा, डॉ. साहब, अब अपने पचास लोग हो गए, अब आप आगे क्या करेंगे? तो डॉ. साहब ने कहा कि पचास के बाद पाँच सौ करेंगे। पाँच सौ के बाद फिर, पाँच हजार करेंगे। पाँच हजार होने के बाद? अभी हुए कहाँ? नहीं-नहीं, मान लो हो गए तो क्या करेंगे? पचास हजार करेंगे। ऐसा बढ़ते-बढ़ते पाँच करोड़ तक पहुँचे, तब उन्होंने ऊबकर पूछा कि आप इनका करेंगे क्या? तो डॉ. साहब ने कहा कि संपूर्ण हिंदू समाज को हमको संगठित करना है। उसमें अपना अलग संगठन नहीं खड़ा करना है। सबको संगठित करना है। यह छोड़कर हमको दूसरा कोई काम नहीं करना है। क्योंकि ऐसा समाज खड़ा होने के बाद जो होना चाहिए, वह अपने आप होगा। उसके लिए 'और' कुछ नहीं करना पड़ेगा।

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