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सरस्वती राजमणि कौन थी ?

सरस्वती राजमणि :-   सरस्वती राजमणि आजाद हिंद फौज के लिए काम करने वाली सबसे कम उम्र की महिला गुप्तचर...   हम में से कितने लोगों ने सरस्वती राजमणि के बारे में सुना है? अधिकांश लोगों ने उनके बारे में कभी सुना भी नहीं है। जबकि वे आजाद हिंद फौज के लिए काम करने वाली सबसे कम उम्र की महिला गुप्तचर थीं। सरस्वती राजमणि का जन्म रंगून में हुआ था। उनके पिता रंगून के सबसे संपन्न भारतीयों में से एक थे। वे त्रिची की एक सोने की खान के मालिक थे।  सरस्वती राजमणि के पिता भी अंग्रेजों के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय थे। बार-बार अंग्रेजों द्वारा की जाने वाली धरपकड़ से बचने के लिए वे रंगून चले गए और वहीं बस गए। वहाँ से भी वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए निरंतर कार्य करते रहे।  सरस्वती राजमणि भी उनके पद चिह्नों पर चलकर देश को स्वतंत्र कराने में अपना योगदान देना चाहती थीं। उन्हें अपने परिवार से भी पूरा सहयोग मिला। सरस्वती राजमणि का जन्म 1927 में हुआ था। बाल्यकाल से ही उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विषय में सुना था। वास्तव में नेताजी ने ही उनका नाम सरस्वती रखा था। इ...

Raja Prithu [राजा पृथु] - भारतीय प्रतिरोध की गाथा

राजा पृथु-1  राजा पृथु  कौन थे?  पृथु असम के राजा थे, जिन्होंने 1206 ईस्वी में बख्तियार खिलजी को बुरी तरह परास्त किया था। असम का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। रामायण, महाभारत, पुराण और अन्य शास्त्रों में असम को ' प्रागज्योतिषपुर ' के नाम से जाना गया है। कालांतर में इसका नाम ' कामरूप ' हो गया, यह नाम भी इतिहास में अनेक जगह आया है। निदानपुर और डूबी में मिले शिलालेखों के अनुसार नरकासुर, भगदत्त, वज्रदत्त और उनके वंशजों ने 3,000 वर्षो तक यहाँ राज्य किया। प्रयागराज में मिले समुद्रगुप्त के एक शिलालेख में कामरूप उसका एक सीमावर्ती राज्य था। अहोम राज्य आने के बाद से मानस नदी के पूर्व का सारा क्षेत्र 'असम' नाम से जाना जाने लगा। असम के एक जिले का नाम आज भी कामरूप है।   1206 ई. में मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने कामरूप पर आक्रमण किया था। खिलजी अपने साथ बारह हज़ार घुड़सवारों की एक बड़ी फौज लेकर आया था। तत्समय असम पर राजा पृथु का शासन था। राजा पृथु ने बख्तियार खिलजी को बुरी तरह परास्त किया। वह बड़ी मुश्किल से ही अपनी जान बचाकर भाग पाया। उसकी अधिकतर सेना भी इस अभियान में नष...

Rampyari Gurjari [ रामप्यारी गुर्जर ]

 रामप्यारी गुर्जर कौन थी :- रामप्यारी गुर्जर-1:-  जिनके नेतृत्व में 40 हज़ार महिला सैनिकों ने तैमूर लंग को नाकों चने चबवा दिये थे।   रामप्यारी गुर्जर  भारतीय इतिहास में एक अल्पज्ञात (अनजाना) नाम है, परंतु उनकी वीरता की कहानी अद्वितीय है। अन्य हजारों वीर और वीरांगनाओं की भांति वह भी न जाने किन कारणों से इतिहासकारों की उपेक्षा का शिकार रही हैं। बीस वर्षीय रामप्यारी गुर्जर ने अपने साथ चालीस हज़ार अन्य महिला सैनिकों को लेकर सन् 1398 में मेरठ और हरिद्वार के क्षेत्र में तैमूर लंग पर ऐसे भयावह हमले किए थे कि वह भारत छोड़कर भागने को विवश हो गया, और फिर कभी इधर का रुख नहीं किया। तत्समय विभिन्न समुदायों और जातियों के लगभग अस्सी हज़ार योद्धाओं ने तैमूर लंग पर स्थान-स्थान पर हमले किए और उसकी सेना के बहुत बड़े भाग को नष्ट कर दिया। और इस प्रकार मेरठ, हरिद्वार और आसपास के समस्त भू-भाग को तैमूर द्वारा लुटने से बचा लिया।  वीरांगना रामप्यारी गुर्जर-2:- तैमूर लंग के विषय में कौन नहीं जानता, उसने लाखों निर्दोष हिंदुओं का नरसंहार किया, अनगिनत उत्कृष्ट मंदिर और मठों को नष्ट-भ्रष्ट क...

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS?)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? (What is RSS? )  यह कार्यप्रणाली (Methodology) है,और कुछ नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का जो संगठन है, वह करता क्या है? वह व्यक्ति-निर्माण का काम करता है। क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार का परिवर्तन आज भी हम चाहते हैं। हमको भेद मुक्त समाज चाहिए, समतायुक्त समाज चाहिए, शोषण-मुक्त समाज चाहिए। समाज से स्वार्थ भी जाना चाहिए।  लेकिन यह जाना चाहिए,केवल ऐसा कहने से नहीं होगा। समाज का आचरण उदाहरणों की उपस्थिति में बदलता है। हमारे यहाँ आदर्श हैं,महापुरुषों की कोई कमी नहीं है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करनेवाले इस भूमि में आदिकाल से इस क्षण तक बहुत लोग हैं। लेकिन अपने सामान्य समाज की प्रवृत्ति क्या है? वह उनकी जयंती, पुण्यतिथि मनाता है। उनकी पूजा जरूर करेगा, उनके जैसा गलती से भी नहीं बनेगा।छत्रपति शिवाजी महाराज फिर से होने चाहिए, लेकिन मेरे घर में नहीं होने चाहिए, दूसरे के घर में होना चाहिए। कुछ वर्ष पहले रीडर्स डाइजेस्ट में एक अंग्रेजी वाक्य पढ़ा था, उसमें यह कहा था कि The ideals are like stars, which we never reach. आदर्श दूर ही रहते हैं। उ...

जम्मू कश्मीर अधिमिलन के महानायक महाराजा हरि सिंह की जयंती पर शत्-शत् नमन - 23 सितंबर 1895 जानिए कौनसे औरंगजेब को चुनौति देते हुए राणा राज सिंह जी मेवाड़ में श्रीनाथ जी की प्रतिष्ठा करवाई। -Maharaja Hari Singh

Maharaja Hari Singh:-  "औरंगजब मुगल साम्राज्य का सबसे क्रूर शासक था। उसने मेवाड़ के आस्था के केंद्र श्रीनाथजी मंदिर पर आक्रमण किया था। मेवाड़ के कई अन्य मंदिरों का भी विध्वंस किया। मेवाड़ में सनातन धर्म से संबंधित केंद्रों को महाराणा राज सिंह का संरक्षण था, जिससे औरंगजेब ने भारी विद्वेष किया था। मेवाड़ सहित समूचे भारत के इतिहास के संदर्भ में औरंगजेब की छवि क्रूर व पक्षपाती शासक की थी।" इतिहासकार प्रो चन्द्रशेखर शर्मा ने दैनिक भास्कर को वक्तव्य दिया।

The Importance of a Mother (माँ का महत्त्व)

 माँ का महत्त्व:- आपको मुक्ति दिलानेवाले ऊँचे से ऊँचे भगवान् ने इसी धरती पर मानव के रूप में जन्म लिया है। यह भारत केवल मनुष्यों की जननी नहीं है। यह देवों की भी जननी है। इसकी सेवा विश्व-जननी की सेवा है। इसकी सेवा है, तो बाकी कुछ नहीं चाहिए। एक बार देवताओं के बीच प्रतियोगिता हुई, वे कौन से देव हैं, जिनका वाहन जल्दी दौड़ता है? सब लोग अपना-अपना वाहन लेकर आ गए। कार्तिकेयजी अपने मोर को लेकर आ गए। इंद्र अपने ऐरावत पर बैठकर और विष्णुजी गरुड़ लेकर आ गए। सबने मिलकर शिवजी को रेफरी बनाया और कहा, “शिव-पार्वती, आप बैठकर देखिए, कौन पहले आता है।” वहाँ गणेशजी भी आ गए। अब गणेशजी का शरीर तो मोटा है। सब लोगों ने कहा, “अरे! आप इतने मोटे हैं। आपका वाहन तो चूहा है, वह क्या दौड़ेगा? आप यहाँ क्या करने आए हैं?” तो गणेशजी ने कहा, “हम भी प्रतियोगिता में आए हैं।” प्रतियोगिता शुरू हो गई, सब लोग दौड़ लगाने चले गए। पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाकर आना था। गणेशजी देखते रहे। *सब लोग दूर चले गए, तब उन्होंने माता पार्वती की तीन प्रदक्षिणा की और बैठ गए।* सब देव वापस आए। जब पूछा गया कि कौन जीता, तो शिवजी ने कहा, “गणेशजी जीते...

Teej and Sinjhara

 what is hariyali teej and sinjhara:- Teej and Sinjhara(सिन्झारा और तीज):- जैसे-जैसे इंटरनेट का दायरा बढ़ा है वैसे-वैसे स्थानीयता ने भी विस्तार पाया है। लोग अपने रीति रिवाजों को पहले से भी अधिक उत्साह से मनाने लगे हैं। हालांकि सीधे तौर पर इसका कारण बाजार ही है और बाजार की रौनक ही घर तक आती है। जो भी हो, लोग अधिक उत्साहित और उदार हुए हैं। वे अपने आस-पास के लोगों की कला, परंपरा और संस्कृति में रुचि लेने लगे हैं। इसी क्रम में राजस्थान के त्योहार जो कभी राजस्थान तक ही सीमित थे, सच कहूँ तो राजस्थानी लोक तक ही सीमित क्योंकि आधिकारिक रूप से उत्सव तो उन्हें आज भी नहीं माना है । > राजस्थान के अपने दो त्योहार जिनमें इस प्रदेश की आत्मा प्रतिबिंबित होती है- तीज और गणगौर । तीज त्योहारों का आगम है और गणगौर समापन। इसीलिए यहाँ कहावत है- तीज तिंवारां बावड़ी ले डूबी गणगौर। दोनों ही उत्सवों को राजस्थान सरकार नहीं जानती इसलिए इन पर कोई अवकाश नहीं। पर उत्सव अवकाशों की दरकार थोड़े रखते हैं। लोग छुट्टी लेकर मनायेंगे। खैर! जो त्योहार अब तक स्थानीय थे वे अब बाहर के लोगों के भी ध्यान में आ रहे हैं। रज...

 “ऑपरेशन सिंदूर”-भारत की सैन्य पराक्रम और रणनीतिक विजयनिति का ऐतिहासिक शंखनादः-Operation Sindoor

 “ऑपरेशन सिंदूर”-भारत की सैन्य पराक्रम और रणनीतिक विजयनिति का ऐतिहासिक शंखनादः- विश्व के इतिहास में पहली बार 90 मिनट में किसी परमाणु राष्ट्र के 11 एयरबेस तबाह भारत ने वह कर दिखाया, जिसे करने का साहस दुनियां की किसी महाशक्ति ने अब तक नहीं किया था। पाकिस्तान के 11 एयरबेस- जिनमें उसके रणनीतिक महत्व वाले सरगोधा जैसे हवाई अड्डे शामिल थे, भारतीय वायुशक्ति के प्रचंड क्रांतिकारी प्रहार से ध्वस्त हो गए। उनके रनवे चीर दिए गए। एयर डिफेंस सिस्टम जलकर राख हो गया। और सरगोधा जैसे हवाई अड्डे पर तो भारत ने ठीक उसी स्थान को निशाना बनाया, जहाँ उनके परमाणु अस्त्र रखे गए थे। सरगोधा एयरबेस ध्वस्त करण के परिणाम: • परमाणु विकिरण का रिसाव • परमाणु चेतावनी • और हर मामले में सरपंच बने अमेरिका की नींद उड़ गई। उन्होंने तुरंत युद्धविराम की गुहार लगाई, क्योंकि दोनों परमाणु राष्ट्रों की टकराहट ने दुनियां को हिला कर रख दिया। लेकिन भारत ने क्या किया? ऑपरेशन सिंदूर बंद नहीं किया?  झुकने से इनकार कर दिया। क्योंकि भारत अब वो भारत नहीं रहा, जो दशकों तक सहता रहा। आज भारत वह राष्ट्र है जो आतंक के गढ़ में घुसकर उसका ...

What is a “blessing”? "आशिर्वाद" क्या है?

 "आशिर्वाद" क्या है?(What is a “blessing”?) आशीर्वाद का अर्थ है किसी के कल्याण की कामना दिल से करना, अर्थात मंगलकामना, सद्रावना की अभिव्यक्ति, प्रार्थना अथवा कल्याणकारी इच्छा, आ शिर्वाद शब्द संस्कृत के 'आशिस' और वाद से मिलकर बना है। और यह ना तो मांगने से मिलता है और ना ही पैसों से खरीदने से, जब आदमी प्रसन्न होता है और उसका हृदय करुणा और भावना से प्रेरित होकर पिघलता है तब उसक़े लिए आशीर्वाद पिघले हुए हृदय से फूट फूट कर निकलता है।

विमर्श (नैरेटिव) का मायाजाल एवं सही विमर्श - Narrative ka Mayajaal

विमर्श (नैरेटिव) का मायाजाल एवं सही विमर्श (Narrative ka Mayajaal)- नैरेटिव का मायाजाल एवं सही विमर्श-1:- • हम क्या हैं, हम कौन थे और क्या कर सकते हैं?  • ऐसे प्रश्नों के उत्तरों की चाबी किसके पास है? • अपनी और दूसरों की दृष्टि में हमारी पहचान क्या है?  • जब किसी विषय विशेष पर हमारे मन में ऐसे कुछ प्रश्न उठते हैं या फिर हमसे उस विषय विशेष पर कोई कुछ पूछता है, तो उन उत्तरों का आधार क्या होता है? इन सभी प्रश्नों के उत्तर को यदि किसी एक शब्द में व्यक्त करना हो, तो उसे "विमर्श या नैरेटिव (Narrative)" कहा जा सकता है। हम वही बोलते हैं और समझते हैं, जो हमें बार-बार दिखाया, सुनाया और सिखाया जाता है। वो ही हमारी विश्लेषण करने की शक्ति, हमारे चिंतन की सीमा, हमारी जानकारी की परिधि और ज्ञान की गहराई को निर्धारित करता है। हमारा चिंतन और मानस (Thinking & Mindset) उस नैरेटिव से बनता है, जो हमारे समक्ष परोसा गया है। "अब वह नैरेटिव सत्य पर आधारित है, अर्धसत्य से प्रेरित है या बिल्कुल झूठा, मिथक है और फर्जी है- यह सब उस नैरेटिव को परोसने वाले और उसकी नीयत (Mentality) पर निर्भर करता...

sql notes in hindi pdf

SQL notes in hindi pdf:- what is sql in hindi (sql क्या है?):- Introduction of sql in hindi:- इस  Oracle  Database के अन्दर डाटा एक्सेस करने के लिए सभी programs और user को  स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लेंग्वेज SQL  का प्रयोग करना होता है । SQL कमांड्स का ऐसा set है , जिसे लगभग सभी  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  द्वारा Recognize किया जाता है। इस SQL का पहला Commercial रूप से उपलबध पहला Implementation 1979 में रिलेशनल सॉफ्टवेयर Incorporation ने जारी किया था और जिसे आज ऑरेल कॉर्पोरेशन के रूप में जाना जाता है । इस तरह  Oracle  ही शुरूआती  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  है , जिसने SQL का उपयोग शुरू किया । इस SQL का उपयोग ज्यादातर  रिलेशनल डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS)  के लिए एक standard बन गया है । हालांकि Application program और ऑरेकल टूल users को सीधे SQL का उपयोग किए बिना डाटाबेस एक्सेस करने की अनुमति देते हैं और इन application को users की Request execute करते समय SQL का उपयोग करना होता है । यह स्ट्रक्चर्ड क्वेरी...

शिक्षक का व्यवहार कैसा होना चाहिए? (What should be the behaviour of a teacher?)

 शिक्षक का व्यवहार कैसा होना चाहिए:-  शिष्य एवं शिक्षक के बीच शिष्टाचार-1:- एक विद्यार्थी अपने शिक्षक से ज्ञान प्राप्त कर जीवन में अग्रसर होता है, अपने जीवन का निर्माण करता है। जो विद्यार्थी अच्छे गुणों को ग्रहण कर शिष्टाचारी बनकर जीवन- पथ पर आगे बढ़ता है; जीवन में उच्च पद, सम्मान आदि प्राप्त करता है और उसको समाज में एक आदर्श व्यक्तित्व का दर्जा प्राप्त होता है। दूसरी ओर वह शिष्य है, जो अशिष्ट है। वह इस दुनियां में आता है और चला जाता है। उसका जीवन कीड़े-मकोड़े की तरह होता है- अर्थात् उनका कोई अस्तित्व नहीं होता। वह निरुद्देश्य जीवन जीते मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। जहाँ एक ओर विद्यार्थियों को अपने गुरुजनों, शिक्षकों के साथ सम्मानजनक उचित व्यवहार करना चाहिए, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को भी अपने शिष्यों, विद्यार्थियों के सम्मान का उचित ध्यान रखना चाहिए, अर्थात् दोनों का एक-दूसरे के प्रति शिष्टाचार आवश्यक है।  शिष्य एवं शिक्षक के बीच शिष्टाचार-2:- विद्यार्थी को अपना कार्य स्वयं करना चाहिए, न कि अपने माता-पिता अथवा अभिभावक पर निर्भर होना चाहिए। जो विद्यार्थी अपना कार्य स्वयं कर...

नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार (Civic duties and etiquette)

 नागरिक कर्तव्य एवं शिष्टाचार :-  घर में शिष्टाचार-1:- घर वह स्थान है, जहाँ से बच्चा प्रथम शिष्टाचार सीखता है; क्योंकि माँ ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है, तत्पश्चात् बच्चा स्कूल आदि से शिष्टाचार प्राप्त करता है। घर में जैसा माता पिता, चाचा चाची या अन्य बड़ों का आपसी संवाद और व्यवहार होता है, बाल मन पर उसका निश्चित प्रभाव पड़ता है। बालक जैसा देखता है, वैसा ही सीखता है। इसलिए परिवार में आग्रहपूर्वक सभी बड़े संयमित व मर्यादित संवाद व व्यवहार करें। घर से ही शिष्टाचार की नींव सुदृढ़ होती है, क्योंकि घर का माहौल, रहन-सहन, बातचीत का ढंग, मेल-मिलाप आदि शिष्टाचार का वह प्रथम अध्याय है, जो किसी को भी सामाजिक प्राणी बनाता है।  घर में शिष्टाचार-2:- घर में कोई सदस्य- चाहे छोटा हो अथवा बड़ा-सभी को एक-दूसरे के प्रति उचित शिष्टाचार अपनाना पड़ता है, तभी घर एक खुशहाल परिवार अथवा ' स्वीट होम ' कहलाता है। जिस घर में लोगों में एक-दूसरे के प्रति शिष्टाचार की भावना नहीं है अथवा वे एक-दूसरे के प्रति उचित शिष्टाचार नहीं अपनाते हैं वह घर घर नहीं, अपितु पशुओं के रहने के स्थान समान होता है, जहाँ प...

महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा

महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा-1:- कुंभ मेला दुनियां में आस्था और आध्यात्मिकता की सबसे असाधारण अभिव्यक्तियों में से एक है, जो भारतीय संस्कृति और धर्म के शाश्वत सार को दर्शाता है। यह हिंदू परंपराओं में गहराई से निहित एक पवित्र तीर्थयात्रा है, जहाँ लाखों भक्त, साधु- सन्त (पवित्र पुरुष), विद्वान् और साधक ईश्वर में अपनी सामूहिक आस्था का उत्सव मनाने के लिए एकत्र होते हैं। जहां राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता के सहज दर्शन होते हैं।* यह स्मारकीय आयोजन महज धार्मिक उत्सव की सीमाओं से परे जाकर भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक जागृति के जीवंत संगम के रूप में विकसित होता है। महाकुंभ-आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिकता की यात्रा-2:- चार पवित्र स्थानों- हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन - पर चक्रीय रूप से आयोजित होने वाला कुंभ मेला सत्य और मोक्ष की शाश्वत खोज का प्रतीक है। इन स्थानों को मनमाने ढंग से नहीं चुना जाता है; वे प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों और आकाशीय संरेखण से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं, जो इन पर्वों को गहन आध्यात्मिक महत्त्व देते हैं। प्रत्येक स्थल नदियों या तीर...